भुमि की उर्वरक क्षमता को बढाने के लिए करें ढैंचा का प्रयोग – कृषि अधिकारी बारूपाल

भुमि की उर्वरक क्षमता को बढाने के लिए करें ढैंचा का प्रयोग – कृषि अधिकारी बारूपाल
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बालोतरा

भूमि में जैविक कार्बन एक प्रतिशत से घटकर 0.2 प्रतिशत के न्यूनतम स्तर पर आ गया है। भूमि में जीवांश बढ़ाने तथा भूमि को स्वस्थ रखने के लिए ढैंचा से तैयार की गई हरी खाद खेत की उर्वरक शक्ति को काफी ज्यादा बढ़ा देती है और इसकी पैदावार भी खेत की उर्वरक क्षमता को बढ़ाती है। इसके पौधे जमीन में नाइट्रोजन की पूर्ति करते हैं।

कृषि अधिकारी दूदाराम बारूपाल ने बताया कि सबसे सस्ती हरी खाद का स्त्रोत है ढैंचा। ढैंचा को अप्रैल-मई में गेहूं कटने के बाद या मानसून आने पर उगा कर बेहतरीन हरी खाद बनाई जा सकती है। इससे भूमि में जीवांश में बढ़ोतरी भूमि व जल संरक्षण तथा पोषक तत्व का उड़ने व रिसने से बचाव होता है। ढैंचा की हरी खाद से फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, कैलशियम मैग्निशियम, लोहा तांबा, जस्ता, मैग्नीज आदि आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व मिलने से भूमि उपजाऊ बन जाती है। ढैंचा की हरी खाद से 22 से 30 किलोग्राम नाइट्रोजन भी प्रति एकड़ मिलती है। इससे भूमि की संरचना सुधरती है। हरी खाद के बाद लगाई जाने वाली फसलों में नाइट्रोजन वाले उर्वरकों की एक तिहाई मात्रा तक कम कर सकते हैं। ढैंचा का बीज हरि खाद के लिए प्रतिवर्ष लगभग 80 प्रतिशत अनुदान पर दिया जाता है।ढैंचा उगाने की उन्नत तकनीक

गेहूं एवं जौ फसल कटने के बाद अप्रैल के आखिरी हफ्ते से मध्य मई तक ढैंचा बिजाई का उत्तम समय है। इस समय बोई गई ढैंचा हरी खाद को भूमि में मिलाने के बाद खरीफ की धान, बाजरा, ज्वार, मक्का आदि खरीफ फसलों की समय से बिजाई की जा सकती है।

बीज मात्रा और बिजाई

खेत की पलेवा व जुताई करने के बाद ढैंचा को बिखेर कर या लाइनों में बिजाई करें सुहागा लगा दें। सामान्य खेतों में 10 से 12 किलोग्राम बीज तथा कल्लर भूमि में 20 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ होना चाहिए। बीज को रात भर पानी में भिगोकर बोने से बीज का जमाव जल्दी होता है। बिजाई के समय 14 किलोग्राम यूरिया तथा 100 किलोग्राम सिगल सुपर फास्फेट प्रति एकड़ बिजाई से पहले डालें। इससे ढैंचा की बढ़वार व जड़ों में नाइट्रोजन का संग्रह ज्यादा होता है। हरी खाद में दी गई फास्फोरस खाद जैविक फास्फोरस के रूप में बदल कर आगे बोई जाने वाली फसल के लिए लाभकारी रहती है। पहली सिचाई ढैंचा बोने के 10 से 12 दिन बाद और बाद की सिंचाई 8 से 10 दिन के अंतर पर करें।

ढैंचा को भूमि में मिलाना

हरी खाद के लिए ढैंचा को बोने के 40 से 50 दिन बाद नरम अवस्था में पटेला चलाकर तथा मिट्टी पलटने वाले हल से हल चलाकर फसल को खेत में दबा देना चाहिए। खेत में कम नमी हो तो पानी लगा देना चाहिए। इससे फसल गल सड़कर खाद में बदल जाती है। हरी खाद दबाने के 22 से 25 दिन बाद फसलों की बिजाई की जा सकती है। धान की रोपाई हरी खाद दबाने के अगले दिन से ही शुरू कर सकते हैं।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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