सभी ब्राह्मण एक सूत्र में रहकर सनातन समाज को दे नई दिशा – नरेंद्रचन्द्रजी सरस्वती

सभी ब्राह्मण एक सूत्र में रहकर सनातन समाज को दे नई दिशा – नरेंद्रचन्द्रजी सरस्वती
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समदड़ी

ब्राह्मण के लिए संध्या उसका मूल है। जो ब्राह्मण सूर्य उदय से पहले एक लोटा जल सूर्य भगवान को अर्पित करते हैं। उन्हें हमेशा तप,ज्ञान व तेज की प्राप्ति होती है। उनका तेज कभी कम नहीं होता है। यह विचार अनंत अनंत विभूषित परीवाज्रक सुमेरूपीठ काशी के शंकराचार्य नरेंद्रचंद्रजी सरस्वती ने परशुराम जयंती समारोह श्रीमाली समाज बगीची समदड़ी में उपस्थित विप्र समुदाय को संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि सभी ब्राह्मणों को एक सूत्र में रहकर समस्त सनातन समाज को नई दिशा देनी चाहिए। जिस प्रकार एक ही शरीर के विभिन्न अंग होते हैं इस प्रकार सभी वर्ण उसे भगवान के अंग है। इसलिए कोई पराया नहीं सभी एक ईश्वर की संतान है। उन्होंने कहा कि परशुराम भगवान जिन्होंने तपस्या के द्वारा इस पृथ्वी से अत्याचारी शासको का अंत किया। वह चिरंजीवी है हमारे जीवन में भी भगवान परशुराम की तरह तप व तेज होना चाहिए। इस अवसर पर कनाना मठ के महंत परशुराम गिरी महाराज ने कहां की ब्राह्मणों को एक होने की नितांत आवश्यकता है। एकता के द्वारा ही सनातन धर्म को हम एकता के सूत्र में बांध सकते हैं। ब्राह्मण ने इस देश के लिए अनेकों कुर्बानियां दी है। इस अवसर पर महामंडलेश्वर निर्मलदास महाराज पंचवटी आश्रम के कृष्णानंदपुरी महाराज, रामद्वारा संत क्षमाराम नरसिंह दास महाराज ने संबोधित किया। राजस्थान ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष जितेंद्र दवे ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में परशुराम भगवान , आदित्य गुरु शंकराचार्य, ब्रह्म ऋषि खेताराम जी महाराज की पूजा अर्चना वैदिक मित्रों के साथ की गई। इस अवसर पर विधायक हमीरसिंह भायल, प्रधान मुकनसिंह राजपुरोहित, जिला परिषद सदस्य गरिमा राजपुरोहित, भाजपा जिला अध्यक्ष बाबूसिंह राजगुरु, राजस्थान महासभा के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनूप शर्मा, विप्र फाउंडेशन प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मेंद्र दवे, जिला अध्यक्ष अशोक व्यास, अशोक शर्मा,बाबूसिंह सिलोर, ब्लॉक वरिष्ठ संरक्षक विरद्धीचंद्र राजपुरोहित श्यामसुंदर दवे, सहित सभी आगंतुक अतिथियों का साफा माला व स्मृति चिन्ह से स्वागत किया गया सभी का आभार सचिव चंद्र सिंह राजपुरोहित द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर जिला प्रतिनिधि रामस्वरूप शाश्वत खेमराज दवे, नैनसिंह राजपुरोहित, त्रिवेणी शंकर दवे, रमेश दवे, कीर्ति श्रीमाली, माधोप्रसाद दवे, रमेश व्यास, राजेश दवे, पोटेदार अनिल व्यास, घनश्याम व्यास जितेंद्र पातो का वाड़ा, सहित ब्राह्मण समाज के लोग उपस्थित थे।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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