बाबा के भक्त समाजसेवी करणसिंह राठौड की भीष्म प्रतिज्ञा।

बाबा के भक्त समाजसेवी करणसिंह राठौड की भीष्म प्रतिज्ञा।
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समाजसेवा के लिए 25 साल घर से दूर रहे 25 साल ओर दूर रहेंगे

समाजसेवा का दूसरा नाम करणसिंह राठौड़

जोधपुर।

बाबा के भक्त समाजसेवी करणसिंह राठौड की भीष्म प्रतिज्ञा लेते हुए समाजसेवा के लिए 25 साल घर से दूर रहे 25 साल ओर दूर रहने का आह्वान किया है।दरअसल फलोदी जिले के छोटे से धोरा धरती के बीच आए गांव उदट ठिकाना के रूपावत राठोङ के परिवार मे एक परम्परा अनूठी रूप से सात पीढ़ियों से चली आ रही है। कि सबसे छोटे बेटे को अविवाहित रहकर परिवार से दूर रहना पड़ता है। और न अपने घर आ सकता है और न ही परिवार के किसी सदस्य से मिल सकता है; परिवार से दूर रहकर मानव मात्र व जीव कल्याण की सेवा करनी होती है।

इससे पहले भी करण सिंह राठौड़ 25 साल परिवार से दूर रहने का व्रत पालन कर चुके है। अभी इनकी उम्र 48 साल की है ओर अब 73 साल बाद ही अपने घर अपने गांव जा सकेंगे। राठौड़ ने कहा कि जिन्दा रहा तो व्रत संकल्प पालन के बाद घर जाऊगा। सामाजिक कार्यकर्ता नरपतसिंह उमरलाई ने बताया कि करणसिंह राठौड़ को कौन नही जानता, जोधपुर मे इस युवा ने समाज सेवा मे अपना जीवन समर्पित कर दिया है जब बात रक्तदान की होती है। या बाबा रामदेव मेले मे भजन संध्या या पैदल यात्रा की होती है। या जातरूओ के सेवा की होती है ।या फिर वानरो के सेवा की होती है। तो लोग करण सिंह राठौड़ का उदाहरण देते हैं, मिसाल देते हैं, राठौड़ ने जोधपुर मे बाबा रामदेव समाज सेवा संस्थान का गठन कर उसके माध्यम से रक्तदान शिविरों का आयोजन करके पीड़ित मानव की सेवा करके अपना जीवन समर्पित कर दिया। परन्तु राठौड़ के जीवन की एक सच्चाई से कई लोग परिचित नही है दरअसल फलोदी जिले के छोटे से धोरा धरती के बीच आए गांव उदट ठिकाना के रूपावत राठोङ के परिवार मे एक परम्परा अनूठी रूप से सात पीढ़ियों से चली आ रही है। कि इस परम्परा के अनुसार सबसे छोटा बेटा को अविवाहित रहकर परिवार से 25 साल दूर रहना पङता है। इस 25 सालो मे वह नही तो घर आ सकता है ना परिवार के किसी भी सदस्य से मिल सकता है। करण सिंह राठौड़ जब छोटे थे तब घर वालो ने तिलक कर लोक देवता बाबा रामदेव जी के नाम करण सिंह राठौड़ को भेंट कर दिया ओर सन्यास के लिए भेज दिया।। लेकिन करणसिंह राठौड़ साधु संन्यासी नहीं बनकर समाज सेवा में आ गये इन 25 सालों मे ना तो घर गये ना परिवार के सदस्य से मिले अपना 25 साल का संकल्प दो साल पहले पूरा कर गांव गये तो सभी गांव वासियों ने शानदार स्वागत किया था। राठौड़ ने बताया कि अब अगली पीढ़ी के किसी सदस्य को इसका पालन करना था। लेकिन अब समय बदल गया ओर कोई सदस्य तैयार नही हुआ उसको भी 25 साल घर से दूर रहना था ओर किसी भी सदस्य से मिलना नही था। तो कोई सदस्य यह संकल्प लेने को तैयार नही तो एक बार फिर करण सिंह राठौड़ ने यह प्रतिज्ञा ली ओर संकल्प के साथ व्रत का पालन करने का निर्णय लिया। राठौड़ ने बताया कि वह फिर 25 साल तक ना घर जाएगे ना परिवार के किसी भी सदस्य से मिलेगे

संयम ओर सेवा की मिसाल हे राठोङ।

महाभारत काल मे भीष्म ने ऐसी प्रतिज्ञा ली थी। कलयुग में बाबा रामदेव जी के परम भक्त करण सिंह राठोङ ने यह भीष्म प्रतिज्ञा की है इन 25 सालो को वह सेवा कार्य मे गुजारेंगे राठोङ ने पूरा जीवन अविवाहित रहकर सेवा मे गुजार दिया लोक देवता बाबा रामदेव जी के परम भक्त हे इसलिए बाबा के नाम का संगठन बनाकर रक्तदान बाबा के जातरूओ की सेवा भजन संध्या सहित अनेक सामाजिक सेवा कार्य ओर पुरस्कार देने का कार्य किया है। अपना गांव छोडने के बाद करण सिंह राठोङ ने जोधपुर को ही अपना कर्म स्थली बनाई।   

 

आसान नही है करणसिंह राठोङ बनना।

वाक़ई करणसिंह राठोङ बनना आसान नही है जब खेलने कूदने की उम्र मे कोई बच्चा घर परिवार से दूर हो जाए ओर 25 साल तक घर नही जाए तो केसा फील होता है। ओर फिर 25 साल घर ना जाए परिवार के सदस्यो से ना मिले तो केसा महसूस होगा। वाकई यह कड़े जज्बे ओर कड़ी प्रतिज्ञा की बात है राठोङ ने इस प्रतिज्ञा का पालन किया। ओर एक बार फिर कठोर व्रत को स्वीकार किया। राठोङ ने बताया की उसकी किस्मत मे सेवा कार्य ही लिखे हुए है। बाबा उनसे विशिष्ट कार्य करवाना चाहता है। यही वजह है जिसके कारण एक बार फिर कठोर व्रत का पालन करने का संकल्प लिया है। देखा जाए तो राठोङ का जीवन सन्त जीवन से कम नही है। वह कई संतो के सानिध्य मे रहकर सेवा कार्य करते है । उनकी संस्था बाबा रामदेव समाज सेवा संस्थान जोधपुर की बङी संस्था हे। ओर अनेक जोधपुर के सेवा भावी लोग जूङे हुए है रक्तदान के माध्यम से हजारों लोगों का जीवन बचाया है ऐसा कार्य करना उनकी जीवटता को दर्शाता है। 

 

ग़ज़ब कार्य करते है राठौड़ 

बाबा रामदेव जी के परम भक्त करण सिंह राठोङ जोधपुर मे अजीब ओर अनोखे सेवा कार्य करते है रक्तदान शिविर के माध्यम से लगातार 60दिन 100 दिन रक्तदान शिविरो का आयोजन कर रक्तदान के क्षेत्र मे क्रान्ति लाए। बाबा रामदेव पुरस्कार का आयोजन कर अनेक समाज सेवीयो का हौसला बढ़ाया। 365,दिन लगातार भजन संध्या का आयोजन करके लोगो मे धार्मिक भावना जगाई । बाबा रामदेव मेले मे जातरूओ की दो महीने लगातार सेवा करते है जोधपुर से रामदेवरा पैदल यात्रा करते है ओर अन्य लोगो को प्रेरित करने के लिए अकेले भी पैदल जाते है।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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