नेगेटिव न्यूज: गुडबाय, अब कभी नहीं मिलेंगे का स्टेटस लगाकर किया सुसाइड

नेगेटिव न्यूज: गुडबाय, अब कभी नहीं मिलेंगे का स्टेटस लगाकर किया सुसाइड
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लिखा- मम्मी-पापा का सपना पूरा नहीं कर पाया, मुझे जिंदगी में रहने का हक नहीं

बाड़मेर

कॉम्पिटिशन एग्जाम की तैयारी कर रहे 24 साल के युवक ने बेरोजगारी से आहत होकर ट्रेन के आगे छलांग लगा दी। सुसाइड से पहले उसने वॉट्सऐप स्टेटस लगाया- गुड बाय, अब हम कभी नहीं मिलेंगे। साथ ही उसने स्टेटस पर रूम में कंप्यूटर बुक में सुसाइड नोट होने की बात भी लिखी। मामला बाड़मेर जिले के रीको थाना इलाके के बीएनसी सर्किल के पास का गुरुवार रात 8.30 बजे है। युवक खेताराम उम्र 24 वर्ष बाड़मेर के सदर थाना इलाके के सरली गांव का रहने वाला था। वह बाड़मेर शहर में मंसूरिया कॉलोनी में किराए का कमरा लेकर रहता था। खेताराम पुलिस, रेलवे और पटवारी के कॉम्पिटिशन एग्जाम की तैयारी कर रहा था। उसने बाड़मेर कॉलेज से बीए कर रखी थी। थानाधिकारी देवाराम ने बताया की बाड़मेर के रीको थाने के बीएनसी सर्किल के पास जोधपुर से आई ऋषिकेश-बाड़मेर ट्रेन के आगे खेताराम कूदकर उसने सुसाइड कर लिया। पायलट ने ट्रेन को रोककर जीआरपी पुलिस को सूचना दी। जीआरपी पुलिस बॉडी को ट्रेन से बाड़मेर रेलवे स्टेशन लाई। इसके बाद रीको थाना पुलिस को सूचना देकर बुलाया गया। खेताराम के पास से कोई डॉक्यूमेंट नहीं मिला। बाद में शिनाख्त हुई।

 

वॉट्सऐप पर अलग-अलग समय लगाए स्टेटस

थानाधिकारी ने बताया कि खेताराम ने गुरुवार दोपहर 3.13 बजे से रात 8.07 बजे के बीच वॉट्सऐप स्टेटस लगाए थे। गुरुवार दोपहर 3.13 बजे उसने स्टेटस लगाया- मिली जिंदगी मस्त और खुश रहो। इस मतलबी दुनिया में कोई किसी का नहीं है। इसके बाद उसने कुछ देर बाद दोपहर 3.22 बजे स्टेटस लगाया- गुड बाय, अब हम कभी नहीं मिलेंगे। इसके बाद रात 8.07 बजे खेताराम का आखिरी स्टेटस सामने आया। जिसमें – मेरे रूम में कंप्यूटर की किताब में एक पेज मिलेगा आपको। इस स्टेटस में खेताराम ने सुसाइड नोट का जिक्र किया था। इसके बाद खेताराम ने अपने फोटो के साथ स्टेटस में लगाया- मेरी जिंदगी की अंतिम रात होगी, ओके दोस्तों गुड बाय। शुक्रवार को पुलिस खेताराम के रूम पर पहुंची। वहां उसके कमरे में कंप्यूटर की किताब से पुलिस को सुसाइड नोट बरामद हो गया। सुसाइड नोट में खेताराम ने लिखा- मैं मम्मी-पापा का सपना पूरा नहीं कर सका।

 

सुसाइड नोट में बेरोजगारी से आहत होने का जिक्र

खेताराम ने सुसाइड नोट में लिखा- मैं खेतेश (खेताराम) परिहार गांव सरली से हूं। मुझे खुद पता नहीं कि कहां से लिखना शुरू करूं। मैं जिंदगी की जंग हार चुका हूं। मेरे माता-पिता ने बहुत सहायता की। अब मैं 24 साल का हो चुका हूं, फिर भी अपने माता-पिता की चाहकर भी सहायता नहीं कर पा रहा हूं। इसलिए मैं खुद शर्मिदा हूं। अब मुझे घर की जिम्मेदारी संभालनी चाहिए। यह मैं नहीं कर पा रहा हूं। मेरी नौकरी नहीं लग रही है। इसी आस में मेरे माता-पिता मेरा इंतजार कर रहे हैं। मैं नहीं कमा रहा हूं। नौकरी नहीं लगने से मैं घर पर बोझ बन गया हूं। इसलिए मेरी जिंदगी यहां समाप्त हो रही है। मेरे लिए यह फैसला लेना बहुत कठिन है। फिर भी बहुत विचार करने के बाद यह फैसला मुझे लेना पड़ा। मैं अपने माता-पिता का सपना पूरा नहीं कर पाया। न ही यह सपना अब पूरा होगा। मैं अपने छोटे भाई से आग्रह करता हूं- मम्मी-पापा का ध्यान अब तेरे को रखना है। मैं जिंदगी छोड़ रहा हूं। इसमें किसी का कोई दोष नहीं है। फालतू या अनजाने में किसी पर कोई दोष नहीं लगाना। अब मुझे इस जिंदगी में रहने का कोई हक नहीं है। मैंने तैयारी भी खूब की और मजा भी खूब किया। फाइनल बात यह है कि बहुत कोशिश के बाद भी मम्मी-पापा का सपना पूरा नहीं कर पाया। ओके बाय ऑल फ्रेंड्स। सॉरी, मेरे एक दोस्त का जिक्र करना भूल गया, उसने मेरी बहुत हेल्प की। गुड बाय। खेताराम।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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