” द लेगेसी ऑफ जिनेश्वर ” मूवी देखने सिनेमा घरों में उमड़ रही हैं भीड़।

” द लेगेसी ऑफ जिनेश्वर ” मूवी देखने सिनेमा घरों में उमड़ रही हैं भीड़।
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मूवी में जिनशासन की महिमा का सुंदर चित्रण।

मूवी सूरत विस्तार के काफी सिनेमा घरों में लगी थी। और कई सिनेमा घरों में लगातार चालू है।

खतरगच्छ के 1000 पूर्ण होने के सहस्त्रशताब्दि के निमित बनी यह मूवी

बाड़मेर जैन श्री संघ ने की डीआर वर्ल्ड के थियेटर में मूवी दिखाने की व्यवस्था, शो हाउस फुल।

सूरत।

खतरगच्छ के 1000 पूर्ण होने के सहस्त्रशताब्दि के निमित बनाई जिन शासन की महिमा के सुंदर चित्रण से ओत प्रोत हिंदी मूवी सूरत शहर में पिछले 19 अप्रेल से धूम मचा रही है। लगातार सूरत के सिनेमा घरों में जैन समाज के लोगो की भारी भीड़ उमड़ रही है। बाड़मेर जैन श्री संघ सूरत के सदस्यों द्वारा आई माता रोड स्थित डी आर वर्ल्ड में ” द लेगेसी ऑफ जिनेश्वर ” हिंदी मूवी दिखाने का आयोजन पिछले 19 अप्रेल शुक्रवार से लगातार जारी है। और लगातार शो चालू है। जिससे इस मूवी को ज्यादा से ज्यादा जैन जैनेतर बंधु देख सके। डीआर वर्ड में लगी मूवी के हर रोज शो में सैकड़ो महिला पुरुष और बच्चो ने जिनशासन की महिमा का चित्रण देखने मे उत्साह दिखा रहे है।

 

भगवान महावीर स्वामी के 2623 वे जन्मोत्सव और जैन खतरगच्छ संघ सहस्त्राब्दी निमित बनी है मूवी।

भगवान महावीर स्वामी के 2623 वे जन्मोत्सव और जैन खतरगच्छ संघ के 1000 वर्ष पूर्ण सहस्त्राब्दी वर्ष पर सिवनी मध्यप्रदेश के अभिषेक मालू ने आचार्य भगवंत श्री जिनपियुषसागर सूरीश्वरजी म.सा.की आज्ञा से खतरगच्छ के उदभव के संदर्भ में ” द लेगेसी जिनेश्वर ” मूवी द्वारा खतरगच्छ के इतिहास की सुंदर चित्रण किया।जिसे देश भर के थियेटरों में जैन जैनेतर श्रावको को बताया जा रहा है। इस मूवी के बारे में बाड़मेर जैन श्री संघ के चम्पालाल बोथरा ने बताया कि खतरगच्छ के 1000 पूर्ण होने के सहस्त्रशताब्दि के निमित ये मूवी बनाई गई है। इस मूवी में खतरगच्छ के एक हजार वर्ष की धरोहर को प्रदशित किया गया है। पूर्व आचार्यों ने अधर्म के राह से धर्म की राह की और संकट झेलते हुए जैन धर्म को आगे बढ़ाया है।आजकल के डिजिटल युग मे युवा पीढ़ी के लिए यह मूवी प्रेरणादायक है।

युवा झील बोथरा ने बताया कि खतरगच्छ के हजार वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष ये मूवी बनाई गई है। पर इस मूवी से आने वाले हजार वर्षों की नींव डाली गई है।

समाज अग्रणीय बाबूलाल संकलेचा ने बताया कि तत्कालीन चुनोतियों का समाधान हमे भगवान महावीर स्वामी के मौलिक सिद्धान्तों से मिलता है।अहिंसा अनेकांत और अपरिग्रह इस फ़िल्म के माध्यम से दर्शकों को जैन धर्म कर महत्वपूर्ण तत्वों को दर्शाया गया है। इस मूवी में राजा ऋषभदेव से लेकर भगवान महावीर तक का सफर और खतरगच्छ की स्थापना जैसे महत्त्वपूर्ण घटनाक्रमो को एक रोचक कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस मूवी को सूरत के अलग अलग विस्तारो के थिएटर में जैन जैनेतर बंधुओ को दिखाई जा रही है। जिसे अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। पुरुष महिला व बच्चे उत्साह से मूवी देखने आ रहे है। बाड़मेर जैन श्री संघ के सुरेश मालू, विनोद धारीवाल, सुरेन्द्र मालू, अनिल डोसी,नरेंद्र सेठिया,पवन संखलेचा, पियूष हालावाला ,राजू बोथरा, संजय मालू, संजय पारख, सुरेन्द्र सेठिया आदि कई सदस्य आईमाता रोड स्थित डीआर वर्ल्ड के थिएयर में मूवी दिखाने की व्यवस्था में अपनी सेवा दे रहे है।

 

 जैन धर्म की संस्कृति की अद्भुत झलक है “द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर”

अनसुने किस्सों को समेटे ‘द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर’ फिल्म जैन धर्म की दीक्षा-आत्मसंयम का विश्लेषण है। जैन धर्म की दीक्षा और गुरु-शिष्य परम्परा को लेकर 19 अप्रैल को द लिगेशी ऑफ़ जिनेश्वर मूवी रिलीज हुई है। “द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर” में जैन धर्म की संस्कृति और अनछुए पहलुओं को दिखाया गया है। जैन धर्म को समझना चाहते हैं तो ‘द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर’ फिल्म जरूर देखे। धर्म पर फिल्म या डॉक्यूमेंटरी बहुत कम बनी हैं। और यही कारण है कि जैन धर्म के बारे में लोगों को जानकारी भी कम होती है। लेकिन “द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर” देखने के बाद इस धर्म की कई सकारात्मक चीजें पता चलेंगी।

“द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर” जैन परंपरा की अनकही कहानी को उजागर करने का वादा करती है। जो भगवान महावीर की महत्वपूर्ण शिक्षाओं और तीर्थंकर की आध्यात्मिक विरासत पर प्रकाश डालती है। दर्शक राजा ऋषभ देव से भगवान महावीर तक की यात्रा के साथ-साथ खतरगच्छ (जैन धर्म में एक संप्रदाय) की स्थापना को एक दिलचस्प कथा प्रारूप में प्रस्तुत करते हुए देखेंगे। महावीर टाकिज और श्री खरतरगच्छ सहस्राब्दी महोत्सव द्वारा जैन धर्म को केन्द्रित करते हुए “द लिगेशी ऑफ़ जिनेश्वर” मूवी रिलीज की गयी है। इस फिल्म में भगवान आदिनाथ और भगवान महावीर की विरासत को वर्धमान सूरी ने आगे बढ़ाया है। संयम के लिए भौतिकवाद को त्याग दिया। उन्होंने दीक्षा ली और आत्म-नियंत्रण का उपदेश दिया।

 

मूवी की पटकथा संवत 1080 से।

फिल्म की कहानी संवत 1080 के आसपास पर बेस्ड है। जिसमें जैन मुनि आचार्य वर्धमानसूरी अपने दो शिष्यों जिनेश्वरसूरी और बुद्धिसागर म सा के साथ मिलकर लोगों को धर्म का मार्ग सिखाते हैं। कहानी अभिषेक मालू की है। जो जैन धर्म को केन्द्रित करते हुए लिखी गयी है। जिसे जैन समुदाय द्वारा बेहद पसंद किया जा रहा है। क्यूंकि इस विषय पर फिल्म इत्यादि सिनेमा जैसा मसाला कम है। लिहाजा फिल्म देखने न सिर्फ जैन धर्म बल्कि अन्य धर्मों के साधार्मिक लोग भी देखने आ रहे हैं।

 

फ़िल्म के माध्यम से जैन धर्म की सरलता।

 इस मूवी में इतिहास,संस्कृति और मूल्यों को समझने का आपको एक अद्वितीय सिनेमेटिक अनुभव मिलेगा। सुरेंद्रपाल सिंह, मनीष बिशला और अनिल लालवानी अभिनीत माइथो-ड्रामा ‘द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर’ को अभिषेक मालू द्वारा निर्मित, प्रदीप पी.जाधव और विवेक अय्यर द्वारा निर्देशित और प्रशांत बेबर द्वारा लिखित यह फिल्म पौराणिक कथाओं और नाटक के एक मनोरम कड़ी देखने को मिलेगी। मूवी में संगीत विवियन रिचर्ड व विपिन पटवा ने दिया है।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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