57 वें निरंकारी संत समागम में दक्षिण गुजरात के भक्तों ने की सेवा

57 वें निरंकारी संत समागम में दक्षिण गुजरात के भक्तों ने की सेवा
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सूरत

दक्षिण गुजरात के लगभग दो हजार निरंकारी भक्त नागपुर में सम्मपन्न हुए महाराष्ट्र के प्रादेशिक 57 वें निरंकारी संत समागम से बुधवार को लौट आए हैं। दक्षिण गुजरात के जोनल इंचार्ज ओंकार सिंह के साथ गए गुजरात के सेवादार भक्तों ने समागम पर जहां विविध रूपों में अपनी सेवाएं अर्पित की, वहीं सत्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज से मानव जीवन को सहज बनाने की सीख को भी आशीर्वचनों के माध्यम से प्राप्त किया। 26 से 28 जनवरी तक चले निरंकारी संत समागम में सत्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज ने कहा कि जीवन में जब परमात्मा का बोध हो जाता है तब आत्मा और परमात्मा के मिलन से एकत्व स्थापित होता है। फिर जीवन में मानवीय गुणों का आना स्वाभाविक हो जाता है। उन्होंने फरमाया कि जिस तरह गणतंत्र दिवस पर अपने देश का संविधान अपनाया गया, इसी तरह अगर मनुष्य मानवीय गुणों का कोई संविधान बना लें और अपने जीवन में लागू करे, तो वास्तव में यह जीवन जीने लायक हो जायेगा। नफ़रत और भेदभावों को छोड़ कर फिर हम प्रेम-नम्रता जैसे दिव्य गुणों को अपनाकर वास्तविक मनुष्य बनकर एक दूसरे का सत्कार करेंगे। केवल किताब़ी तरीके से नहीं बल्कि ब्रह्मज्ञान द्वारा पूरे ब्रह्मांड के कण कण में, हर एक में परमात्मा को देखकर मानवता का व्यवहार कर पाएंगे। सत्गुरू माता जी ने जीवन की सार्थकता को समझाते हुए कहा कि संसार में सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों ही प्रकार की प्रवृत्तियां विद्यमान हैं जिसका चुनाव हमें अपने विवेक से स्वयं ही करना होता है। ब्रह्मज्ञान हमें विवेकशील दृष्टिकोण प्रदान करता है जिसको अपनाकर हम सकारात्मक भाव से एक भक्ति भरा जीवन जीते चले जाते हैं। हम चाहे तो एक सही मनुष्य बनकर फरिश्ते जैसा जीवन जी सकते हैं, जो मनुष्य का मूल स्वभाव भी है, अन्यथा इसके विपरीत दिशा में जाकर दानवीय प्रवृत्ति से ग्रसित हो सकते हैं। यह चुनाव हमारा अपना है, इसके लिए परमात्मा ने हमें हर तरह की क्षमता प्रदान की है।समागम में मोहन भागवत का स्वागत किया। वहीं विभिन्न स्थानों से आए वक्ताओं ने भी गीत, कविता और व्याख्यान के माध्यम से समागम के विषय सुकून अंतर्मन का पर अपने भाव प्रस्तुत किए, इसमें बच्चों ने भी काव्य रचना पेश की।समागम में शारीरिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संतुलन, युवा एवं महिला सशक्तीकरण की दिशा में निरंकारी मिशन द्वारा किए जा रहे कार्यों को दर्शाने वाली एक प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। इसमें हजारों संत भक्तों सुविधा के लिए अनेक कार्यालय बनाए गए, इसी में लंगर में सूरत के भक्तों ने सेवा कर पुण्य कमाया, इसके अतिरिक्त अन्य सेवाओं में समर्पित भक्तों द्वारा भी प्रेमाभक्ति और निष्काम सेवा का भाव परिलक्षित किया गया।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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