36 घण्टो में भी फाल्ट नही सुधार पाए डिस्कॉम कर्मी।

36 घण्टो में भी फाल्ट नही सुधार पाए डिस्कॉम कर्मी।
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सिवाना

कस्बे में वर्षो पुराने विधुत तंत्र के सुधार को लेकर लम्बे समय से ठोस उपाय नहीं हो पाने के कारण फाल्ट के नाम पर कटौती होने की समस्या से लोग परेशान हैं। इधर कस्बे में पिछले 36 घण्टो में भी स्थानीय डिस्कॉम अधिकारी व कार्मिक विधुत फॉल्ट का पता तक नही लगा पाए। सुधार तो बाद कि बात है। दरअसल डिस्कॉम में बुधवार को विधुत रखरखाव के लिए सुबह 6.30 बजे से 9.30 बजे तक घोषित कटौती की थी। बाद में 10.30 बजे से बिजली की आंख मिचौली चलती रही। गुरुवार को पूरे दिन डिस्कॉम की टीम कस्बे के बालोतरा रोड से मोकलसर रोड के बीच फॉल्ट ढूंढती रही। खबर लिखे जाने तक शाम तक फॉल्ट नही मिला न विधुत आपूर्ति कस्बे में रात्रि आठ बजे बहाल हो पाई। 

 

गर्मी में लोग होते रहे परेशान

एक तरफ तो भयंकर उमस भरी गर्मी वहीं दूसरी तरफ विद्युत विभाग की बिजली कटौती और कटौती एक दो तीन घंटे नहीं बल्कि 36 घंटे लगातार पूरे कस्बे में विधुत आपूर्ति गुल रही। जिसको लेकर ग्रामीणों ने विधुत विभाग के कर्मचारी और अधिकारियों को अवगत करवाया लेकिन अभी तक समस्या का सामाधन नहीं हो पाया है । आखिर ऐसे माहौल में भयनकर गर्मी में समस्या का सामाधन कब तक हो पाएगा भगवान ही जाने। ऐसा मामला कोई ग्रामीण इलाके का नही हैं बल्कि हेडकवाटर सिवाना का है आखिर सिस्टम इतना कमजोर कैसे हो गया हैं।जिसके चलते क्षेत्रवासियों को पूरी रात गर्मी में बितानी पड़ी। अधिकांश घरों के इन्वर्टर भी बंद हो गए। जिससे भीषण गर्मी में छोटे बच्चों का बुरा हाल हो गया।बुधवार देर रात तक लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकलकर गलियों में आ गए की लाईट आये तो जान में जान आए पर नहीं आई लाईट। यह सिलसिला गुरुवार को भी जारी रहा।

आखिर क्यों नही सुधार होता है विधुत समस्या का

सिवाना में पिछले लगभग दो दशक से कस्बे में विशेषकर विधुत फॉल्ट की समस्या आमजन के लिए नासूर बन गई है। आखिर क्यों नही सुधार हो रहा है। इस विधुत समस्या का ? इसका कारण ढूढने के लिए दैनिक नमस्कार नेशन ने इसकी तह तक जाने का प्रयास किया है। कस्बे में आज से 60 साल पूर्व हुए विधुतकरण के बाद से विधुत तंत्र में प्रतिवर्ष लाखों रुपए खर्च तो होते हैं। लेकिन धरातल पर सुधार नही किया जाता है। जिसके चलते आज भी वही जर्जर विधुत पोल व ढीले तार हल्के से हवा के झोंके से झूलकर विधुत फॉल्ट को जन्म दे देते हैं। बदलते विधुत कार्मिको को विधुत फॉल्ट ढूढने में घण्टो लग जाते हैं। इधर स्थाई कार्मिक ज्यादातर फॉल्ट निकालने के खुद पोल पर नही चढ़ते हुए भाड़े के निजी कार्मिको को चढ़ाते हैं। जिससे भी विधुत अव्यवस्था को बल मिल जाता है।

 

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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