उमस व गर्मी के प्रहार से धोरों में अब फुफकारने लगे हैं नाग।

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बढ़ने लगी है चिकित्सालयों में सर्पदंश की घटनाएं

फलसूंड

उमस व गर्मी के प्रहार से धोरों में अब जहरीले नाग फुफकारने लगे हैं। जिससे विशेषकर ग्रामीण इलाको व नहरी क्षेत्र में आए दिन सर्पदंश के मामले सामने आ रहे हैं। जिला मुख्यालय स्थित राजकीय जवाहर चिकित्सालय हो या नहरी क्षेत्र स्थित स्वास्थ्य केन्द्र, आए दिन सर्पदंश से पीड़ित पहुंच रहे हैं। गर्मी अभी शुरुआती दौर में ही है। ऐसे में आने वाले दिनों में सर्पदंश की घटनाएं और अधिक बढऩे की आशंका जताई जा रही है। अप्रेल तक जहां अस्पताल में इक्का-दुक्का सर्पदंश पीड़ित भर्ती होते थे। इन दिनों विषैले व विषहीन दोनों तरह के सर्पों के काटने के मरीज सामने आ रहे हैं।

सर्वाधिक मामले गांवों से

सर्पदंश के सर्वाधिक मामले ग्रामीण क्षेत्रों से आ रहे हैं। शीतकाल में सर्प बिलों में रहते हैं, लेकिन गर्मी में भोजन की तलाश में बाहर आ जाते हैं। रेतीले व सूने क्षेत्रों जहां मनुष्य की आवाजाही कम होती है। वहां सर्पों का विचरण अधिक देखने को मिल रहा है। सांप काटने से स्नायु तंत्र प्रभावित हो जाता है। और हाथ-पैर फूल जाते हैं। चिकित्सकों के अनुसार जिला मुख्यालय स्थित राजकीय जवाहर अस्पताल में जनवरी से अब तक सर्पदंश के 60 मामले आए हैं।

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी डॉ. नीरज कुमार वर्मा बताते हैं कि बांडी नामक सांप जहरीला है। सर्वाधिक सर्प दंश के मामले इसी के सामने आ रहे हैं। पलड़ व गौरावा नामक सांप के काटने के मामले भी सामने आ रहे हैं।

 

कैसे बचें सर्पदंश से

 सांप अधिकांशत: पैरों में ही डसते हैं, इसलिए नंगे पैर नहीं घूमना चाहिए। ग्रामीणों व किसानों को रात में टॉर्च या अन्य किसी प्रकार की रोशनी का उपयोग करना चाहिए। खेतों में रखवाली के दौरान चप्पलों की बजाय पैरों में जूते पहनें। अगर किसी को सांप डस लेता है। तो उस स्थान पर चीरा न लगाएं। चीरा लगाने की वजह से खून ज्यादा बहने की आशंका रहती है। सांप के काटने के स्थान से कुछ दूरी पर ऊपर की ओर कसकर न बांधें। कई सांप ज्यादा जहरीले होते हैं। सांप के काटने पर नीम हकीमों, झोला छाप चिकित्सकों, झाड़ -फूंक व भोपों के चक्कर में न पड़कर सीधे ही सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए जाएं।

ग्रामीण क्षेत्र में सर्प दंश के मामलों पर नजर।

चिकित्साधिकारी डॉ. नीरज कुमार वर्मा सीएससी पभारी के अनुसार बरसात के बाद जुलाई, अगस्त, सितंबर एवं अक्टूबर में सर्पदंश की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। क्षेत्र में अप्रेल 2015 से मार्च 2016 तक 43 मामले सर्प दंश के सामने आए हैं। जिसमें अप्रेल में 3, जून में 1, जुलाई में 9, अगस्त में 6, सितंबर में 12, अक्टूबर में 6, नवंबर में 2, तथा मार्च 16 में 4 व्यक्तियों को सांप ने काटा है।

 

नि:शुल्क उपचार

एंटी स्नेक वेनम से सर्पदंश का इलाज किया जाता है। करीब 500 रुपए की लगात का यह इंजेक्शन सरकारी चिकित्सालयों में नि:शुल्क दिया जाता है। सरकारी अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीरज कुमार वर्मा का कहना है कि अस्पताल में सर्पदंश के इलाज की सुविधा है और प्राथमिकता से इनका उपचार किया जाता है। एक ही मरीज को कई बार दस से पन्द्रह इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं। मेडिकल रिलीफ सोसायटी की ओर से रसीद कटवाने के बाद पीड़ित मरीज को पूर्ण इलाज होने तक इंजेक्शन मुफ्त लगाए जाते हैं।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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