नेताओ की कमजोर पैरवी के कारण यहाँ हर साल लाखों गेलन व्यर्थ बह जाता है बरसाती पानी

नेताओ की कमजोर पैरवी के कारण यहाँ हर साल लाखों गेलन व्यर्थ बह जाता है बरसाती पानी
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72 किमी छप्पन की पहाड़ियों में जल संग्रहण के ठोस उपाय नही

जिसके कारण सिवाना सहित 25 पंचायतों के लोग पेयजल को तरसने पर है मजबूर

सिवाना

उपखण्ड के 72 किमी दूरी में फैली छप्पन की पर्वतमालाओं से हर साल निकलने वाले बरसाती पानी के संग्रहण को लेकर लम्बे समय से स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कमजोर पैरवी एवं सरकारी स्तर पर ठोस उपाय नही किये जाने से हर साल लाखों गेलन बरसाती जल व्यर्थ बह जाता है। जिसके कारण क्षेत्र में प्रति वर्ष भूजल स्तर पेंदे बैठता जा रहा है। नतीजन जहाँ एक ओर किसानों का खेती किसानी का कार्य छीनता जा रहा है। वही दूसरी ओर दशकों पूर्व जिले का कश्मीर कहा जाने वाला सिवाना अब सूखे बंजर की ओर बढ़ते हुए पीने के पानी के लिए तरस रहा है।

बड़ी बांध परियोजना प्रस्तावित नही।

उपखण्ड में आज दिन तक बहुतायत मात्रा में बहने वाले बरसाती पानी के संग्रहण को लेकर बड़ी बांध परियोजना नही बन पाई है। जिसकी क्षेत्र के भाखरडा बेल्ट में जरूरत है। जहाँ लम्बी पर्वतमालाओं से निकलने वाला भारी मात्रा में बरसाती पानी 22 किमी लम्बी पहाड़ी नदी का रूप धारण कर लेता है। जो आगे जाकर जालोर जिले के गावाई तालाबो में समाती है। 10 फिट से 13 फिट भराव क्षमता के ऐनीकट बांध उक्त पानी को रोक नही पाते है। नतीजन उक्त एनीकट या तो टूट जाते हैं। या फिर उन्हों में दरारें आ जाती है। तथा सरकारी बजट व्यर्थ बह जाता है।

 

नही बढ़ पाई जिले के सबसे बड़े मेली बांध की भराव क्षमता

रियासत काल में बना बाड़मेर जिले का सबसे बड़ा मेली बांध भी सिवाना उपखण्ड में स्थित है। जिसकी भराव क्षमता भी मात्र 18 फिट ही है। बदलती सरकारों ने इसकी भराव क्षमता बढ़ाकर संग्रहित पानी से सिचाई के लिए उपयोग में लेने के लिए बड़े बजट की कार्ययोजना प्रस्तावित नही किये जाने से आस पास के एक दर्जन गांवों के किसानों को इसका लाभ नही मिल पा रहा है। तथा यह बांध मानसून की पहली अच्छी बारिश में ही ओवरफ्लो हो जाता है। इनके अलावा क्षेत्र के सेला बांध, नानेरी वागुण्डा बांध गोलिया, तेलवाड्डा बांध, पिपलून बांध, मांगी बांध, धीरा का थबावडाबांध की भी वर्षो से भराव क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े बजट की कार्ययोजना धरातल पर नही लाने से उक्त बांध पहली बारिश में ही ओवरफ्लो हो जाते हैं। तथा समय पर विभाग द्वारा सुध नही लेने से उक्त बांध वर्तमान में रेत व झाड़ियों से अटे पड़े हैं।

 

35 में से 25 पंचायतों का भूजल रीता

वर्षो से बरसाती पानी के संग्रहण के ठोस उपाय नही हो पाने के कारण क्षेत्र की कुल 35 में से 25 ग्राम पंचायतों में गत दो दशक से भूजल स्तर 400 – 500 फिट की गहराई में पेंदे बैठ गया है। तथा मात्र दस ग्राम पंचायत पादरू, धारणा, सिणेर, सेला, धीरा ,कुण्डल, काखी, पऊ, इटवाया, वेरानाड़ी में सिचाई योग्य पानी कम मात्रा में बचा है।

 

बड़ी बांध परियोजना की जरूरत

बरसाती जल संग्रहण को लेकर छप्पन की पर्वतमालाओं में मेली बांध सहित अन्य बांधो की भराव क्षमता बढ़ाने तथा नई बड़ी बांध परियोजना की जरूरत है। इसके लिए कई बार सरकारी स्तर पर मांग की गई है। लेकिन कोई कार्यवाही नही हो पाने से भूजल स्तर पेंदे बैठ गया है। पीने के लिए पानी को तरस रहे हैं।

महेन्द्र  छाजेड़ पूर्व उप प्रधान सिवाना 

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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