राजस्व खातों में नाम सुधार की कवायद नहीं चढ़ पाई सिरे

राजस्व खातों में नाम सुधार की कवायद नहीं चढ़ पाई सिरे
Spread the love

 खाताधारकों को नहीं मिल रहा सम्मानजनक नाम, निरक्षरता बनीं बाधक

नहीं मिल रहा है ‘रामुड़ा’ को सम्मान !

बालोतरा:

भारतीय संविधान ने भले ही प्रत्येक नागरिक को सम्मानता के साथ जीने का अधिकार दिया है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते सिवाना उपखंड क्षेत्र के कई राजस्व खाता धारकों को आजादी के सालों बाद भी सम्मानजनक नाम नहीं मिल पाया है। राजस्व खातों के नाम सुधार की कवायद कागजों में अटक कर रह गई है।

 

बेवा’ शब्द का इस्तेमाल

सरकार ने 1995 में निर्देश जारी कर ‘बेवा’ शब्द को हटा दिया था, इसके बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में आज भी ‘बेवा’ का इस्तेमाल किया जा रहा है। भूमि संबंधी दस्तावेज में राजस्व अधिकारी व कार्मिक विधवा महिलाओं के लिए ‘बेवा’ शब्द दर्ज कर रहे हैं।

दरअसल ग्रामीण क्षेत्र के राजस्व रिकॉर्ड में वर्षों पहले कई व्यक्तियों के नाम रामुड़ा, प्रेमला, भलीया, धतरिया, सम्मुड़ी, धनिया, बल्या जैसे उप नाम दर्ज हो गए। जबकि इनका वास्तविक नाम कुछ और है। ऐसे में नाम को सम्मानजनक बनाने के लिए सरकार ने राजस्व रिकॉर्ड में सुधार की कवायद शुरू तो की, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव के साथ लोग निरक्षर होने से नाम सुधार के आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। सिवाना व समदड़ी तहसीलों के सैकड़ों खातेदारों के नाम आधे-अधूरे हैं। जबकि महज कुछ पढ़े-लिखे खातेदारों ने गत प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान या कार्यालय में पहुंचकर नाम शुद्धिकरण

करवाए।

 

निरक्षरता बनी बाधक

सम्मान सूचक नाम नहीं होने की दशा में सरकार की ओर से दुरस्तीकरण के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन निरक्षरों के लिए सरकारी कायदे बाधक बन रह गए हैं। सरकार की ओर से ऐसे नामों के शुद्धिकरण से पूर्व खातेदारों से आवेदन लेने के आदेश है। मगर लोग अनपढ़ होने से नाम शुद्धिकरण के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।

 

यह आ रही हैं परेशानी

राजस्व विभाग के उप शासन सचिव ने 30 अप्रैल 2003 व 18 जून 2007 को परिपत्र जारी कर बताया कि राजस्व रिकॉर्ड में पाबूड़ा वल्द रामुड़ा, कमिया जैसे नाम सम्मान सूचक नहीं हैं। ऐसे गलत नाम की दशा में एसडीएम नियमानुसार कार्रवाई करते हुए राज- स्थान भू-राजस्व अधिनियम की धारा 1956 की धारा 136 के तहत त्रुटियों का दुरस्तीकरण करें। लेकिन आवेदन प्रक्रिया व निरक्षरता से नाम शुद्धिकरण में बाधक बन रही है।

 

निरक्षर नहीं कर पा रहे आवेदन

नाम सुधार के लिए प्रस्ताव लिए गए हैं, लेकिन अधिकतर ग्रामीण निरक्षर है। ऐसे में शुद्धिकरण के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। गत प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान ग्रामीणों को शुद्धिकरण के लिए काफी प्रेरित किया था।

सुरेश कुमार पटवारी

 

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

Related articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Don`t copy text!