रोजगार गारंटी योजना: काम लेने की गारंटी है, मगर मजदूरी भुगतान की नहीं।

रोजगार गारंटी योजना: काम लेने की गारंटी है, मगर मजदूरी भुगतान की नहीं।
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सालभर से बकाया मजदूरी के लिए भटक रहे हैं श्रमिक

 डबरी निर्माण में लगे मजदूरों के साथ हुआ घोर अन्या 

छत्तीसगढ़

बकावंड ग्राम पंचायत में गत एक साल से मनरेगा मजदूरों को बकाया मजदूरी का भुगतान नहीं मिलने के कारण आर्थिक तंगी से रूबरू होने पर मजबूर हैं। यह1कहना अतिश्योक्ति नही होगी कि रोजगार गारंटी योजना में काम लेने की गारंटी है लेकिन मजदूरी भुगतान की कोई गारंटी नही है। अपनी मेहनत की कमाई के लिए गुहार लगाते लगाते थक चुके मजदूरों को जनपद पंचायत के अधिकारी भी टरकाते चले आ रहे हैं। इससे यह साबित होता है कि रोजगार गारंटी योजना के कार्यों में रोजगार मिलने की तो गारंटी है, मगर पगार मिलने की नहीं। जब विकासखंड मुख्यालय के मजदूरों का इस तरह शोषण हो रहा है, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि विकासखंड की दूरस्थ ग्राम पंचायतों में क्या हाल होगा। विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत बकावंड में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत सालभर पहले बकावंड डबरी निर्माण का कार्य कराया गया था। ग्राम पंचायत के माध्यम से कराए गए डबरी निर्माण में जमकर पसीना बहाने वाले मजदूरों को आज तक मजदूरी राशि का भुगतान नहीं किया गया है। मजदूर ग्राम पंचायत के कर्ता धर्ताओं से लाख बार मिन्नतें कर चुके हैं। पंचायत प्रतिनिधि मजदूरों को संतोषजनक जवाब नहीं देते। वहीं जब मजदूर जनपद पंचायत कार्यालय में जाते हैं। तो वहां के अधिकारी कहते हैं कि कल भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन अधिकारियों का यह कल 1 साल बाद भी नहीं आ पाया है। कड़ी मेहनत कर डबरी बनाने वाले मजदूर हताश और परेशान हो चले हैं। उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। वे घर की जरूरत का सामान नहीं खरीद पा रहे हैं। इसके चलते उनमें भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

कलेक्टर – सीईओ से गुहार।

डबरी निर्माण में काम करने वाले मजदूर रमिया, गिरधर, गोपीनाथ, पुष्पा, भगवती, सोना, विमला, गणपति, सुब्बती, सुमित्रा, कमलू, भगवती, परसों, फूलो, दयामणि, नीला आदि ने कहा है कि सालभर बाद भी मजदूरी का भुगतान न किए जाने से उन्हें लगने लगा है कि मजदूरी राशि डकार ली गई है। मजदूरों का कहना है कि केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना में काम करा लेने की तो गारंटी है, मगर मजदूरी मिलने की गारंटी नहीं है। अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि केंद्र और राज्य की सरकारों की छवि धूमिल करने में लगे हैं। मजदूरों ने बस्तर के संवेदनशील कलेक्टर विजय दयाराम के. और जागरूक जिला पंचायत सीईओ प्रकाश सर्वे से आग्रह किया है कि वे मजदूरी दिलाने के लिए जनपद सीईओ को तत्काल निर्देशित करें।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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