धोखाधड़ी कर अकाउंट की डिटेल बेचने वाली गैंग को धर दबोचा

धोखाधड़ी कर अकाउंट की डिटेल बेचने वाली गैंग को धर दबोचा
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कॉल कर लोगों को फंसाते, लालच देकर बैंक अकाउंट खोलकर हैकर्स को बेचते

पाली

कॉल सेंटर के जरिए गरीबों को फंसाकर उनके बैंक अकाउंट हैकर्स को बेचने वाली गैंग का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पाली में यह गैंग 50 से ज्यादा वारदातों को अंजाम दे चुकी है। मामला औद्योगिक थाना क्षेत्र का है। जहां से गरीबों के अकाउंट की डिटेल बेची गई है। आरोपी पीड़ितों के अकाउंट की डिटेल लेकर हैकर्स को बेचकर मोटी रकम प्राप्त करते हैं। हैकर्स इन खातों से धोखाधड़ी के पैसे का लेनदेन करते। ताकि जब भी कोई कार्रवाई हो तो नियम के मुताबिक खाता धारक पर ही हो। पुलिस अधीक्षक चूनाराम जाट ने बताया की 13 मार्च को औद्योगिक थाने की एसएचओ पाना चौधरी को सूचना मिली कि भगवती विहार में एक मकान में कुछ लड़के फर्जी कॉल सेंटर चला रहे हैं। फर्जी बैंक अकाउंट भी खुलवा रहे हैं। इसके बाद थाने के उपनिरीक्षक भंवरलाल मय साइबर थाना टीम को मौके पर भेजा। इस दौरान पुलिस ने औद्योगिक थाना क्षेत्र के सोसाइटी नगर निवासी 41 साल के श्रवण कुमार पुत्र जगदीश कुमार और भगवती विहार निवासी अभिषेक बीके उम्र 35 वर्ष पुत्र धीरज बीके को गिरफ्तार किया। अभिषेक नेपाल के किम सुनर्या पाटन का मूल निवासी है। आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, अलग-अलग बैंकों की डायरियां, फर्जी व्यापारिक प्रतिष्ठान की रबर स्टांप, बैनर, घी के डिब्बे, नमकीन, खाली कार्टून आदि बरामद किए। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि इस सामग्री का उपयोग वे साइबर फ्रॉड के लिए करते थे। आरोपी श्रवण के खाते से करीब 50 लाख रुपए का लेन-देने होना सामने आया है। जबकि दोनों आरोपी समेत अन्य बैंक खातों से करीब ढाई करोड़ से अधिक का लेन-देने होने की संभावना है।

 

अकाउंट खुलवाने की एवज में देते 30 हजार

पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपी गरीबों को बैंक अकाउंट खुलवाने की एवज में 10 से 30 हजार रुपए का लालच देते थे। फिर उनके दस्तावेजों में बदलाव कर अकाउंट में फोन नंबर बदलवा देते। इसके बाद पुलिस जब आरोपियों को खोजती तो गरीब व्यक्ति ही पकड़ में आते। पुलिस ने बताया कि पाली में संभवत: पहली बार ऐसी गैंग पकड़ी गई है।

 

ऐसे करते थे ठगी की वारदात

दोनों आरोपी साइबर ठगों के संपर्क में थे। साइबर ठग इन्हें 50 हजार रुपए एक फर्जी बैंक अकाउंट उपलब्ध करवाने के लिए देते थे। इसके कारण आरोपी ऐसे लोगों की तलाश करते, जिन्हें पैसों की जरूरत रहती थी। उन्हें रुपए देते और उनके दस्तावेजों से बैंक अकाउंट खुलवाते थे। इसके बाद अकाउंट में हैकर्स के दिए मोबाइल नंबर जुड़वा देते। फिर अकाउंट को हैकर यूज करता था। हैकर ऑनलाइन ठगी के जरिए जो रुपए आते थे। उनका इसी अकाउंट से लेन-देन करते और वारदात को अंजाम देते थे।

 

इस टीम ने पकड़ी गैंग

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विपिन शर्मा ने बताया की आरोपियों को पकड़ने के लिए टीम का गठन किया गया। इसमें औद्योगिक थाना एसएचओ पाना चौधरी, उपनिरीक्षक भंवरलाल, हेड कॉन्स्टेबल राजूराम, कॉन्स्टेबल भवानी सिंह, अशोक, सूर्यनारायण, प्रकाशचंद्र और कॉन्स्टेबल रमेश आरोपियों को पकड़ने वाली टीम में शामिल रहे। पुलिस अधीक्षक चूनाराम जाट ने कहा कि साइबर ठगी से बचने के लिए अपने बैंक अकाउंट, एटीएम की जानकारी किसी से भी साझा नहीं करें, साथ ही अपनी बैंक डायरी या अन्य दस्तावेज भी किसी अन्य को न देवें।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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