अनदेखी: देखरेख के अभाव में मर्ज हुए सरकारी स्कूल हो रहे बदहाल, रखरखाव की दरकार

अनदेखी: देखरेख के अभाव में मर्ज हुए सरकारी स्कूल हो रहे बदहाल, रखरखाव की दरकार
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एक समय में छात्रों से गुलजार रहने वाला यह विद्यालय आज हैं वीरान

मायलावास

शिक्षा विभाग की ओर से राजकीय विद्यालयों के एकीकरण की प्रक्रिया के अंतर्गत क्षेत्र के कई विद्यालयों को बंद किया गया था। जिन्हें अभी तक नहीं खोला गया है। इस कारण आसपास के बच्चों को दूसरे स्कूलों में जाना पड़ता है। यह विद्यालय वापस शुरू कर दिए जाए तो अन्य सरकारी विद्यालयों पर दबाव भी कम हो सकता है। उल्लेखनीय हैं कि शिक्षा विभाग की ओर से एकीकरण की प्रक्रिया के अंतर्गत क्षेत्र के कई विद्यालयों को बंद किया गया था। तब से यह विद्यालय अभी तक बंद ही पड़े है। इन विद्यालयों का संचालन वापस शुरू कर दिया जाए तो आसपास के बालक बालिकाओं को निजी स्कूलों में और दूर के सरकारी विद्यालयों में नहीं जाना पड़ेगा। बता दें कि ब्लाक में ऐसे दर्जनों स्कूल हैं जिनकी हालत खराब हो रही है। लाखों रूपयों से बनाए गए स्कूल भवन नकारा साबित हो रहे है। सरकार ने दावा किया था की इन मर्ज स्कूलों के भवन को हम सामाजिक विकास के लिए उपयोग में लाएंगे। हालांकी विभाग ने इन खाली भवनों के सार्वजनिक उपयोग की अनुमति दे रखी है। लेकिन उचित देखभाल न होने के कारण पिछले सालों से बंद स्कूल के भवनों की हालात बेहद दयनीय होती जा रही है। अगर इन्हें समय रहते उपयोग में नही लिया गया तो निश्चित रूप से यह भवन एक दिन खंडहर में तब्दील हो जाएंगे।

 

देखरेख के अभाव में हुए बदहाल, रखरखाव की दरकार

इन बंद पड़े विद्यालयों की देखरेख नही होने की वजह से अब यह भवन बेसहारा पशुओं व समाजकंटकों की शरण स्थली बने हुए हैं। अधिकांश भवनों के मुख्य द्वार खुले होने पर बेसहारा पशु दिन में यहां सुस्ताते हैं। वहीं एकांत स्थान पर होने की वजह नशेड़ी प्रवृत्ति के लोग जाम छलकाते रहते हैं। ऐसे में इन भवनों को सरकारी विभागों को हस्तांतरित करने को लेकर पैरवी की जरूरत हैं। राज्य स्तर पर जनप्रतिनिधि पैरवी करे तो इसका समाधान निकल सकता हैं। बावजूद इसके कोई ध्यान नहीं दे रहा। जिसके चलते लाखों रुपए की सरकारी सम्पत्ति धीरे-धीरे जर्जर होती जा रही हैं।

 

खुले तो बच्चों को मिलेगा लाभ

दरअसल आजकल राजकीय विद्यालयों में प्रवेशोत्सव की प्रक्रिया के चलते बच्चों की संख्या में इजाफा होने लगा हैं। ऐसे में इन विद्यालयों की मरम्मत कर इनमे अध्यापन कार्य पुन: शुरू कर दिया जाए तो आसपास के बच्चों को लाभ मिलेगा। इन बच्चों को पढऩे के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। इससे इन विद्यालयों में बच्चों की संख्या भी बढ़ जाएगी। वहीं निजी विद्यालयों में जाने वाले बच्चों की संख्या भी कम हो सकेगी। ऐसे में सरकार अगर पहल करके इन विद्यालयों का पुनः संचालन करें तो निश्चित रूप से आसपास के बच्चों को लाभ होगा।

 

इनका कहना

यह विद्यालय मोकलसर पीईईओ क्षेत्र के अधीन आता है, सरकारी रिक्त भवन है, इसमें विभाग का कोई सामान वगैरह नही है, सुरक्षा को लेकर ऐसा कोई कर्मचारी नियुक्त नही है, इसका प्रस्ताव भेजा हुआ है सरकार के डिसीजन का इंतजार है, बाकी समाजकंटकों पर नकेल कसने का काम पुलिस का है।

हनुमानाराम चौधरी, एसीबीईओ सिवाना

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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