पहल: ग्रामीणों ने साफ सफाई कर दिया स्वच्छता का संदेश, जिम्मेदार मुखदर्शक

पहल: ग्रामीणों ने साफ सफाई कर दिया स्वच्छता का संदेश, जिम्मेदार मुखदर्शक
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प्रतिबंध के बावजूद कचरे में पॉलीथिन का अंबार, काल के गाल में समा रहा गौवंश

मायलावास

एक दौर में आमजन की सुविधा हेतु ईजाद किया गया पॉलीथीन आज मानव जाति के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है। अगर हम वास्तविक दृष्टिकोण से देखें तो प्लास्टिक पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा बनता जा रहा है। जिसके सबसे बड़े शिकार हो रहे मूकबधिर पशु। दरअसल मामला सिवाना उपखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत मायलावास का हैं, जहां मनाही के बावजूद लोगों द्वारा पॉलीथिन कचरे के रूप में डाली जा रही हैं, जिसको खाकर गौवंश काल के ग्रास में समा रहे हैं, ग्रामीणों ने सफाई करवाने को लेकर कई बार अवगत करवाया मगर सुध नही ली गई। इस पर ग्राम वासियों ने रविवार को पुरानी ग्राम पंचायत व सरकारी स्कूल परिसर के अग्र भाग में बिखरी पॉलीथिन का निस्तारण किया व आसपास में खड़ी कंटीली झाड़ियों की साफ सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया। इस दौरान ग्रामीणों ने बताया कि पॉलीथिन आज मूक पशुओ के लिए घातक साबित हो रही हैं जिसके चलते आए दिन गौवंश काल के गाल में समा रहे हैं। इसलिए ग्रामीणों ने मिलकर साफ सफाई कर स्वच्छ भारत अभियान में महती भूमिका निभाई, साथ ही पॉलीथिन का निस्तारण कर पर्यावरण के लिए घातक सिद्ध होने वाली वस्तुओं का उपयोग नही करने का संदेश दिया और इसके लिए अन्य लोगों को भी जागरूक करने की बात कही। इस दौरान करण सिंह, मनोहर सिंह, जबर सिंह, मदन सिंह, स्वरूप सिंह, देव सिंह, दिनेश सिंह सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।

 

आये दिन फेंका जा रहा प्लास्टिक युक्त कचरा

गांव में जगह-जगह पर प्लास्टिक युक्त कचरा फेंका जा रहा हैं जहां पर मूकबधिर पशु अपने पेट की तृप्ति मिटाने के लिए प्लास्टिक खा रहे हैं जिससे आये दिन मवेशियों की मृत्यु हो रही हैं। यह वाकई चिंतनीय विषय हैं जिसको त्वरित अमल में लाना बेहद आवश्यक हैं। 

 

मवेशियों पर पड़ रही भारी

विगत कुछ वर्षों में प्लास्टिक का उपयोग बहुत ही तेजी के साथ हो रहा हैं। हम अपनी सुविधा और साहूलियत के लिए पॉलिथीन का बार-बार इस्तेमाल करते हैं। ये जानते हुए भी कि पॉलिथीन का इस्तेमाल करना कितना जानलेवा है। हम पॉलिथीन का इस्तेमाल कर उसे कचरे के ढेर में तो फेंक देते हैं, लेकिन इसके बाद ये ही कचरा बेजुबान पशुओं के लिए मौत का अहम कारण बन जाता हैं।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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