पक्षियों को बचाना हम सब का कर्तव्य है :- श्री महंत उमरलाई

पक्षियों को बचाना हम सब का कर्तव्य है :- श्री महंत उमरलाई
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1100 परिंडो का लिया है संकल्प :- उमरलाई

बालोतरा

बेजुबान पक्षियों के लिए परिंडे लगाओ अभियान के तहत उमरलाई के श्री महंत रामानंद जी सरस्वती के हाथों सामाजिक कार्यकर्ता नरपतसिंह उमरलाई ने मंदिर परिसर में बेजुबान पक्षियों के लिए परिंडे लगाकर उसमें नियमित पानी डालने का संकल्प दिया। समाजसेवी रूपसिंह राजपुरोहित ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी वीर दुर्गादास सेवा समिति व रक्तकोष मित्र मंडल के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता नरपतसिंह उमरलाई ने मंदिर परिसर सहित कई धार्मिक व सार्वजनिक स्थानों पर बेजुबान पक्षियों के लिए परिंडे लगाकर उसमें नियमित पानी डालने का संकल्प दिया। उमरलाई मठ के श्री महंत रामानंद जी सरस्वती ने कहा कि बेजुबान पक्षियों की सेवा ही परम सेवा है। गर्मी का मौसम है पक्षियों की रक्षा करना सबसे बड़ा पुनीत कार्य है। ना जाने कितनी गर्मी की वजह से पक्षी मर जाते हैं। गर्मियों का मौसम विशेषकर पक्षियों के लिए बहुत कष्टप्रद होता है। उन्हें बचाने के लिए थोड़ा प्रयास कर आस पास के के क्षेत्रों में परिंडे लगाकर व नियमित पानी डालने से बहुत से पंछियों की जान हम बचा सकते हैं। पक्षियों को बचाने के लिए हर युवा को आगे आना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता नरपतसिंह उमरलाई ने कहा कि भामाशाहों के सहयोग से वीर दुर्गादास सेवा समिति व रक्तकोष मित्र मण्डल के बैनर तले बेजुबान पक्षियों के लिए परिंडे लगाओ अभियान के तहत 1100 परिंडो का संकल्प लिया है। जो आए दिन आस पास के गांवों के धार्मिक व सार्वजनिक स्थानों पर परिंडे लगाकर उसमें नियमित पानी डालने की जिम्मेदारी के साथ संकल्प दिया जाएगा। उमरलाई ने कहा कि पर्यावरण को संतुलित रखने में पेड़-पौधों के साथ ही पशु-पक्षियों की भूमिका भी अहम है। लेकिन मनुष्य के अत्यधिक हस्तक्षेप के चलते इन सबकी संख्या कम होती जा रही है। यदि हम जल्द नहीं चेते तो स्थिति भयावह हो सकती है। कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग से जहां पक्षियों की संख्या कम होती जा रही हैं। वहीं कुछ प्रजातियां तो विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी हैं। गर्मियों का मौसम विशेषकर पक्षियों के लिए बहुत कष्टप्रद होता है। उन्हें बचाने के लिए सभी को थोड़ा-थोड़ा प्रयास करना होगा। हर व्यक्ति कम से कम एक परिंडा या सकोरा पानी का भरकर छायादार स्थान में रख दें तो बहुत से पंछियों की जान बच सकती हैं। इस दौरान भीख सिंह भाटी, बाबूराम पालीवाल, विजयसिंह भाटी, भीखाराम देवासी, विजय पालीवाल, आम्बाराम, नेमाराम, गोपाल देवासी आदि मौजूद रहे।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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