कुमट से लदे कुमटिया के पेड़, गुणवत्ता के साथ देता हैं बेहतर जायका

कुमट से लदे कुमटिया के पेड़, गुणवत्ता के साथ देता हैं बेहतर जायका
Spread the love

नमस्कार नेशन/सिवाना

उपखंड क्षेत्र के खेतों की बाड़ व ओरण भूमि में इन दिनों कुमट की बहार छाई हुई हैं। दरअसल ग्रामीण क्षेत्रों में कुमटिया का पेड़ बहुतायत में पाया जाता हैं। बबूल के जैसे दिखने वाले ये पेड़ इन दिनों कुमट से लदे हुए नजर आ रहे हैं। जिसकी गुणवत्ता भी हैं और जायका भी हैं। इन दिनों महिलाएं व बच्चे इन्हें ओरण से तोड़कर बाजारों में अच्छे भाव में बेच रहे हैं। जिनकी सब्जी बनाकर लोग बड़े ही चाव से खाते हैं। यह मुख्यतः खेतों की दीवार पर या जंगलों में पाये जाते हैं इसकी ऊंचाई 8-9 मीटर की होती है, जो घनी शाखाओ में फैला हुआ होता हैं और इनके पत्ते बहुत ही छोटे छोटे होते हैं। यह कांटेदार पेड़ होने की वजह से जंगलों व मरुस्थलीय क्षेत्रों में आसानी से पनप जाता हैं। इस पेड़ का हर एक हिस्सा काम का होता हैं इसके वृक्ष से गोंद का भी उत्पादन होता हैं जो गर्भवती महिला के लिए किसी वरदान से कम नही होता हैं।

 

कब मिलते हैं इसके फल, बीज़ और सब्जी

सर्दी की शुरुआत मे ही इस पर सफेद रंग के फूल आने शुरू हो जाते हैं जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में इसे मींझर कहा जाता हैं। इसके बाद वो मींझर हरी फलियों में तब्दील हो जाती हैं। इन कच्ची फालियो से निकलने वाले बीज से भी लजीज सब्जी बनाई जा सकती हैं और सुखाकर भी बीज निकाले जाते हैं, जो गोल व चिकने काले रंग के होते हैं जिन्हें कुमट, कुमटिया, हेलारिया इत्यादि नामों से जाना जाता है। इन बीजो को उबाल कर सुखा लिया जाता है जिसे सब्जी बनाने मे उपयोग मे लिया जाता है। पंचकुटा सब्जी मे कुमटिया का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता हैं।

 

स्वास्थ्य के लिए होता हैं बेहद लाभदायक

कुमट के बीजों में अन्य प्रजातियों के मुकाबले फास्फोरस, जिंक और सेलेनियम की मात्रा ज्यादा होती है। कई जानकारों का मानना हैं कि इसके बीज में 39 प्रतिशत प्रोटीन होता है। वहीं इसके पेड़ पर गोंद भी लगता हैं जिसका उपयोग आयुर्वेदिक औषधियों के अतिरिक्त राजस्थान में महिलाएं लड्डू बनाने में भी उपयोग करती है। स्तनपान कराने वाली महिलाओं में इससे दूध की मात्रा का इजाफा होता है, वहीं गर्भवती महिलाओं की रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।

 

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का साधन

ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसके कुमट और गोंद दोनों को अच्छे भावों में बेचते हैं जिससे उन्हें कमाई का एक अच्छा माध्यम मिल जाता हैं। गांवो में लोग कच्चे कुमट के बीज बाहर निकालकर अच्छे दामों में बेचते हैं। वहीं सूखने के बाद भी अच्छे दामों में बिकते हैं। लोग इन्हें विभिन्न जगहों से एकत्रित कर बाजार में बेचते हैं।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

Related articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Don`t copy text!