चुनावी आचार संहिता में उलझा गत वर्ष खरीफ फसलों के खराबे का अनुदान।

चुनावी आचार संहिता में उलझा गत वर्ष खरीफ फसलों के खराबे का अनुदान।
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गत वर्ष के खरीफ फसलों के खराबे के अनुदान का किसान एक साल से ताक रहे हैं राह।

सिवाना

क्षेत्र के गत वर्ष संवत 2079 में खरीफ फसलों के तहत मूंग मोठ बाजरा इत्यादि फसलों के हुए खराबे का अनुदान एक साल गुजर जाने के बावजूद अभी तक किसानों को नसीब नहीं हो पाया है। गत वर्ष लगभग 25,772 हेक्टयर में बाजरा, मूंग, मोठ, ग्वार ज्वार इत्यादि फसलों की बुवाई किसानों ने की थी। उसके बाद लगातार बारिश की कमी के कारण सिवाना तहसील क्षेत्र में किसानों की जुबानी के अनुसार 90 से 100 प्रतिशत तक फसले जलकर नष्ट हो गई थी। जिससे किसानों को खरीफ बुवाई के दौरान आर्थिक हानि उठानी पड़ी थी। किसानों ने बुवाई के लिए बीज व टेक्टर जुताई का खर्चा भी उधार रुपये लाकर करना पड़ा था। तथा पैदावार के नाम पर कुछ भी हासिल नही हो पाया था।

दो दो चुनावी आचार संहिता में उलझा किसानों का अनुदान

खरीफ फसलों के खराबे के बाद राजस्व विभाग व कृषि विभाग द्वारा मार्च 2023 में खराबे का सर्वे करवाया गया था। जिसके तहत लगभग अलग अलग गाँवो में 50 से 80 प्रतिशत खराबा दर्शाया गया था। सर्वे की रिपोर्ट भी आगे प्रेषित की जा चुकी है। लेकिन लगातार हुए विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगते रहने से खरीफ फसलों का अनुदान आचार संहिता के फेर में उलझता गया। जिससे समय पर किसानों को खरीफ फसलों के खराबे का मुआवजा अभी तक नही मिल सका है।

शीघ्रता से जारी किया जाए अनुदान

गत वर्ष खरीफ फसलें बारिश की कमी से जलकर नष्ट हो गई थी। खराबे का सर्वे हुए भी महीनों हो गए हैं। लेकिन अभी तक फसलों के खराबे का अनुदान नही मिल सका है। शीघ्रता से अनुदान जारी किया जाए।

अनुदान प्रक्रिया के तहत कार्यवाही जारी है

गत वर्ष के फसल खराबे के तहत सभी हल्का पटवारियों को किसानों के आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्य जारी है।

रायचन्द देवासी तहसीलदार सिवाना

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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