हमारे गांव कस्बे में पुरानी शान रहने दो, मकां रोटी व कपड़े का महज अरमान रहने दो : कवि सुनील पटेल

हमारे गांव कस्बे में पुरानी शान रहने दो, मकां रोटी व कपड़े का महज अरमान रहने दो : कवि सुनील पटेल
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 चितरी में एक शाम श्री राम के नाम राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन

डूंगरपुर

चितरी गांव के लक्ष्मीनारायण चौक पर बुधवार को एक शाम श्रीराम के नाम राष्ट्रीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कवि सम्मेलन में देर रात तक ओज, हास्य, श्रंगार एवं करुण रस की धारा प्रवाहित होती रही। वरिष्ठ गीतकार दिनेश पंछी ने मां सरस्वती को शब्दसुमन अर्पित कर कवि सम्मेलन का श्रीगणेश किया। सुप्रसिद्ध मंच संचालक छत्रपाल शिवाजी ने आरंभ में ही “हर हिन्दू का तन भगवा है, हर मन में श्रीराम है। राम हमारी सुबह-शाम है, राम ही आठों याम है। हर कण कण में हर गट गट में, राम ही चारों धाम है। राम नाम जो नहीं मानता, निश्चित कोई हराम है।” पंक्तियां पढ़ते हुए सम्पूर्ण वातावरण को राम मय कर दिया। नेजपुर के ऊर्जावान कवि सुनील पटेल सन्नाटा ने “हमारे गांव कस्बे में पुरानी शान रहने दो, मकां रोटी व कपड़े का महज अरमान रहने दो। देश का स्वाभिमान सीमा पर डटा जवान है, देश की पहचान खेत में खड़ा किसान है” कविता सुनाते हुए भरपूर प्रशंसा बटोरी। वागड़ी हास्य के धुरंधर कवि सुरेश सरगम ने “वेलेंटाइन डे को भूल जाइए, शान से करवा चौथ मनाइए, यही भारतीय संस्कृति है संस्कार है, जय श्री राम का उदघोष हमारा सबसे बड़ा त्योहार है” की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को ऊंचाइयां प्रदान की। इंदौर के ओजस्वी कवि हिमांशु भावसार हिन्द ने अपनी वीर रस की विविध कविताओं के माध्यम से उपस्थित श्रोताओं को रोमांचित कर दिया। साथ ही “राम मेरे है प्रणम्य राम ही तो प्राण है, राम मेरे है धनुष भी राम ही तो बाण है, राम है बजरंग दिल में राम लंका कांड है, राम कण कण में समाएं राम ही ब्रह्मांड है” कविता से जोश भर दिया। प्रतापगढ़ से पधारे अन्तर्राष्ट्रीय पैरोडीकार पार्थ नवीन ने “बौद्ध, जैन, सिक्ख, मुस्लिम, ईसा और हिन्दू तू। साक्षी मलिक भी तू है और पी वी सिंधु तू। सेना का जुनून भी है, युवाओ की जान है। सारे जहां से अच्छा मेरा हिन्दुस्तान है। कभी इंदिरा बनी है तू तो बनी अटल बिहारी कही। जग घुमैया थारे जैसा ना कोई।” सहित हास्य व्यंग्य की कई पैरोडियां सुनाकर लोटपोट कर दिया। लोकप्रिय हास्य कवि मुन्ना बैटरी मंदसौर ने “संघर्षों का ये किस्सा अब जमाने मे पहचाना जाएगा। मैं जो आज कह रहा हूँ ये अनन्त काल तक माना जाएगा। भूल जाएंगे ये लोग कि ताज प्रेम की निशानी है। अब दुनिया मे हिंदुस्तान को राम मंदिर से जाना जाएगा।” सहित अपनी अनेक चुटकियों और टिप्पणियों से खूब ठहाके लगवाएं। ख्यातनाम वागडी कवि दिनेश पंछी ने “वेवण, फागण, गणपति बप्पा” सहित अपने कई बेहतरीन कलाम सुनाकर माहौल को गरिमा प्रदान करते हुए श्रोताओं को खूब हंसाया। “खत्म हुई समस्या जो कई बरसों से लटकी थी, पूर्ण हुई तपस्या जो कई पीढ़ियों से अटकी थी” गीत सुनाकर राम की महिमा का सरस गायन किया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपप्रधान कमला डेंडोर, सरपंच दुर्गा कटारा, खोजम गाकड, मुस्तफा बोहरा, ईश्वर सुथार, देवीलाल डाडी, दीतिया कटारा आदि उपस्थित रहे। प्रारंभ में भगवान राम की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर आरती की गई। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक धनपाल भावसार व देवीलाल सुथार द्वारा अतिथियों एवं कवियों का माल्यार्पण एवं साफ़ा बांधकर स्वागत किया गया। कवि सम्मेलन का संचालन छत्रपाल शिवाजी ने किया। अंत में जयकांत पंवार ने आभार जताया।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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