शादीशुदा युवक गर्लफ्रेंड के साथ ट्रेन के आगे कूदा, प्रेमिका बची, प्रेमी की मौत

शादीशुदा युवक गर्लफ्रेंड के साथ ट्रेन के आगे कूदा, प्रेमिका बची, प्रेमी की मौत
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भाई ने लगाया आरोप: हत्या कर शव पटरी पर फेंका

बालोतरा

बालोतरा में दो बच्चों का पिता अपनी गर्लफ्रेंड के साथ सुसाइड करने रेलवे ट्रैक पर पहुंच गया। ट्रेन को आते देख प्रेमिका घबराकर पीछे हट गई, वहीं युवक कूद गया। इससे मौके पर ही युवक की दर्दनाक मौत हो गई। पुलिस ने बताया की घटना खेड़ रेलवे स्टेशन के पास गुरुवार रात करीब 11.30 बजे हुई। मामला प्रेम-प्रसंग का है, जिसमें दोनों ने एक साथ जान देने का फैसला किया था। हालांकि युवक के भाई का कहना है कि पहले युवक की हत्या की गई, उसके बाद शव को पटरी पर फेंका गया। पचपदरा थाना इंचार्ज लेखराज ने बताया की पचपदरा थाना इलाके के खेड़ गांव में रहने वाले राजू भाट उम्र 34 वर्ष पुत्र भवंरलाल भाट और इसी गांव की लड़की रवीना उम्र 20 वर्ष पुत्री केसनाथ का एक साल से अफेयर चल रहा था। राजू शादीशुदा था, उसके दो बच्चे हैं। लड़की अविवाहित है। दोनों यशवंतपुर-बाड़मेर एक्सप्रेस ट्रेन के सामने कूदने वाले थे, लेकिन लड़की डरकर पीछे हट गई। इस दौरान युवक की ट्रेन से कटने से मौके पर ही मौत हो गई। देर रात ट्रेन के गार्ड युवक का शव और लड़की को बालोतरा स्टेशन लेकर आए।

 

15 साल पहले हुई थी शादी

पुलिस का कहना है की राजू की शादी 15 साल पहले हुई थी। वह मजदूरी कर अपना परिवार चलाता था। उसके दो बच्चे हैं। इनमें एक बेटा 8 साल का तो दूसरा 5 साल का है। घटना की जानकारी के बाद शुक्रवार सुबह राजू के परिजन पचपदरा थाना पहुंचे। जानकारी में सामने आया कि गुरुवार की रात राजू और रवीना के बीच झगड़ा हुआ। इसके बाद दोनों आत्महत्या करने खेड़ गांव के पार रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए। जहां पर राजू ने रेल के आगे कूदकर जान दे दी।

 

हत्या का आरोप, गिरफ्तारी की मांग

शुक्रवार सुबह राजू के परिजन मॉर्च्युरी पहुंचे और हंगामा किया। राजू के भाई बीरमाराम ने इसे हत्या बताया। उसने लड़की और उसके परिजनों पर साजिश के तहत राजू की हत्या करने और शव को पटरियों पर फेंकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रात 11.30 बजे आरोपियों ने भाई को मारकर पटरी पर सुला दिया और हादसा बता दिया। उन्होंने पहले भी भाई को जान से मारने की धमकी दी थी और अब उन्होंने भाई की हत्या कर दी। जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी तब तक शव नहीं उठाएंगे।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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