मोटिवेशनल स्टोरी, युवाओं के रोल मॉडल आईआरएस भोला जी रैबारी की कहानी

मोटिवेशनल स्टोरी, युवाओं के रोल मॉडल आईआरएस भोला जी रैबारी की कहानी
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 नमस्कार नेशन/जालोर

ये एक ऐसे चरवाहा की कहानी है, जिस के संघर्ष पर बॉलीवुड की एक फ़िल्म बन सकती है। हमारे जालोर के सांथू गांव के रहने वाले अमरा बा गोंगल के बेटे भोलाराम जी रैबारी की बात कर रहा हूँ। गाय- भेड़ – बकरियां चराने वाले इस पशुपालक परिवार के इस युवा भोलाराम जी ने असम्भव के विरुद्ध संघर्ष करके उसे सम्भव बनाकर एक मिसाल कायम की है। कम उम्र में भोलाराम जी के माता जी का देहांत हो गया था। विपरित परिस्थितियों में मजदूरी करके एक एक रुपये जोड़कर अमरा जी बा रैबारी ने बेटे भोलाराम को सरकारी स्कूल में पढ़ाया। काबिल बनाया। लगन और धून के पक्के भोलाराम शुरुआत में पैरा टीचर में सलेक्ट हुए औऱ सात साल तक पैरा टीचर की नौकरी करते रहे। इस दौरान भोलाराम जी नौकरी, घर पर पशुपालन के काम में सहयोग के साथ ही सिविल सेवा की तैयारी करते रहे। बिना किसी कोचिंग के बचपन से ही गाय-भेड़ – बकरियों के पीछे भागने वाले इस नौजवान ने देश की सबसे बड़ी परीक्षा आईएएस एग्जाम को पास करके धमाका कर दिया। वो इनकम टैक्स सेवा के लिए सलेक्ट हो गए। आज भोलाराम जी रैबारी इनकम टैक्स विभाग में गुजरात में पदस्थ एडिशनल कमिश्नर है। अमरा जी बा के सौ वर्ष पूरे होने पर मैं भोला जी के घर बैठने गया था। तब देसी नालों वाले घर को देखकर इस गुदड़ी के लाल की सादगी और सरलता ने मेरे मन पर गहरी छाप छोड़ी। मुझे लगा कि आदमी विचारों से और अपने काम से बड़ा होता है न कि बड़े बंगले बनाने से या बड़ी गाड़ी में गोल्ड पहनकर घूमने से लोग उसे बड़ा मानते है। सोना भले कहीं हो वो सोना ही रहेगा और पीतल पर कितनी परत चढ़ा दो वो एक दिन उतरनी ही है। बचपन में एक एक रुपये के संघर्ष को देखने वाला यह नौजवान भोला राम जी अब धन्ना सेठों के आय – व्यय का सही- हिसाब किताब की मॉनिटरिंग करते हुए देश की तिजोरी भरने की जिम्मेदारी निभा रहा है। हम जानते ही है कि इन्कम टैक्स अधिकारियों की कलम की ताकत के आगे बड़े बड़े धन्ना सेठ हाथ जोड़कर खड़े रहते है। ये सफर जमीन से आसमान छूने जैसा है। बेहद ईमानदार और काबिल अधिकारियों में शुमार भोलाराम जी रैबारी ने बचपन में संघर्ष की आदतों को अब अपना शौक बना लिया है। आपको ये जानकर सुखद लगेगा कि इन्कम टैक्स अधिकारी भोलाराम जी रैबारी एक दिन भी बिना नागा वर्षों से रोजाना ही सवेरे 25 किलोमीटर की दौड़ लगा कर वो अपनी सेहत और स्फूर्ति मेंटेन किए हुए है। भोला राम जी की नियमितता को देखकर लगता है कि किसी दिन वो वर्ल्ड मैराथन रेस जीतकर रिकॉर्ड बना लें तो आश्चर्य नहीं होगा। इतने बड़े ओहदे के बाद भी भोला रैबारी जी आज भी भोला रैबारी ही बने हुए है। ये बड़ी बात है। उनकी फेसबुक पर जाकर आप चेक कर सकते हो। उनका नाम भोला रैबारी ही नज़र आएगा। वरना आजकल तो थोड़ी सी सफलता के पंख लगते ही खासकर आईएएस सेवा के अधिकारी वर्ग नए एलीट क्लब में शामिल होते ही बड़ा दिखने के चक्कर में सबसे पहले पुरानी पत्नी की जगह नई मैम लाने समेत पता नहीं क्या क्या बदल देते है। ऐसे दुनिया भर के उदाहरण हमारे सामने है। हमें खुशी और गर्व है कि हमारे भोला रैबारी जी आज भी वैसे ही सच्चे मन से भोले भंडारी की तरह शिवत्व के निर्लिप्त भाव से देश, समाज, संस्कृति और सरकार के प्रति अपने कर्तव्य को पूरी ईमानदारी से निभा रहे है। असल में भोला जी रैबारी जैसे लोग ही हमारे असली हीरो है। भोला जी देवासी की सफलता ने शिक्षा में पिछड़े पशुपालक देवासी समाज के हज़ारों युवाओं ने उच्च शिक्षा हासिल करके सरकारी नौकरियों एवं स्वरोजगार प्राप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाने शुरू किए। आज परिणाम आपके सामने है। भोला जी देवासी ने सोती कौम में शिक्षा की अलख जगाने का बेमिसाल काम किया है। श्री भोला जी रैबारी की कड़ी मेहनत, लगन, जुनून जालोर समेत पूरे देश के संघर्षशील युवाओं के आगे बढ़ने के लिए रोल मॉडल का काम कर रहा है। 

 

इनका कहना

 इतने बड़े ओहदे पर पहुंचने के बाद भी सहजता, सरलता और विनम्रता ही भोला जी रैबारी को बड़ा बनाती है। 

आज हमारे ऐसे हीरो श्री भोला रैबारी जी का जन्मदिन है। मैं प्रवासी राजस्थानी फ्रेंड्स फाउंडेशन की तरफ से भोला जी रैबारी को जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई देता हूँ। आप भी भोलाराम जी रैबारी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दे सकते हो। ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वो भोला जी रैबारी को सदा स्वस्थ रखें और खूब तरक्की प्रदान करावें। 

श्रवण सिंह राठौड़ 

प्रेसिडेंट प्रवासी राजस्थानी फ्रेंड्स फाउंडेशन दासपां, भीनमाल

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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