उपेक्षा का शिकार नेशनल हाइवे: कहीं बरसाती नाले क्षतिग्रस्त तो कहीं उखड़े पड़े हैं बेरिकेट्स 

उपेक्षा का शिकार नेशनल हाइवे: कहीं बरसाती नाले क्षतिग्रस्त तो कहीं उखड़े पड़े हैं बेरिकेट्स 
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कई बार अवगत करवाने के बावजूद आज भी स्थिति जस की तस, जिम्मेवार बने बेपरवाह

मायलावास

केंद्र सरकार द्वारा आमजन का सफर सुगम हो इसलिए बालोतरा-सांडेराव एनएच 325 का निर्माण करवाया गया था लेकिन उचित देखभाल के अभाव में आज इस हाइवे पर अनियमितताओं का अंबार लगा हुआ हैं। आलम यह हैं कि प्रभावी मोनिटरिंग के अभाव में हाइवे के किनारे जल निकासी के लिए लगे स्लैब टूट चुके हैं। जहां आए दिन मवेशी गिरकर चोटिल हो रहे हैं। वहीं कई मर्तबा इन बरसाती नालों में वाहन फंस चुके हैं, इसके बावजूद अब तक एनएच के जिम्मेवारों द्वारा समाधान की दिशा में कोई कदम नही उठाया जा रहा हैं। जगह-जगह बेरिकेट्स टूटे पड़े हैं जिन्हे स्थाई तौर पर लगाने की बजाय खानापूर्ति की जाती हैं। वहीं नियमित साफ सफाई के अभाव में सड़क पर रेत की परतें जमी पड़ी हैं जिसकी वजह से आए दिन वाहन चालक चोटिल हो रहे हैं। इसको लेकर ग्रामीणों में कार्यकारी एजेंसी के खिलाफ भारी रोष व्याप्त हैं। ग्रामीणों ने बताया कि डंके की चोट पर टोल तो वसूल किया जा रहा हैं लेकिन आमजन की राह अभी तक आसान नही हुई हैं। यहां फुटपाथ पर लोगों ने अस्थाई कब्जा कर लिया हैं। जिससे आवागमन में लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही हैं। ग्रामीणों ने कई बार इस बारे में स्वर मुखर किए मगर अभी तक स्थिति जस की तस बनी हुई हैं। आलम यह हैं कि जिनके कंधों पर नेशनल हाईवे 325 के रखरखाव की जिम्मेदारी हैं वो मुखदर्शक बन बैठे हैं। उक्त समस्याओं से कई बार संबधित एजेंसी को अवगत करवाया मगर उनके आज दिन तक उनके जूह तक नही रेंगी। यह विडंबना ही हैं कि हाइवे ऑथोरिटी द्वारा यात्रियों को नेशनल हाईवे पर तमाम सुविधाएं मुहैया करवाई जाती हैं मगर जिनकी जिम्मेदारी हाइवे के रखरखाव की हैं वो रत्तीभर भी गंभीर नजर नही आ रहे हैं। जिसका खामियाजा आमजन भुगत रहे हैं।

जगह-जगह क्षतिग्रस्त बरसाती नाले

दरअसल मायलावास चोराहा से गुजरने वाले नेशनल हाइवे 325 के दोनों तरफ नाले के ऊपरी भाग क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। जिसमें गिरकर पशु बेमौत मर रहे हैं। कई बार बड़े वाहन भी अंदर धंस चुके हैं, जिनकी आज दिन तक मरम्मत नही की गई हैं, साथ ही नाले के ऊपर की स्लेब टूटने से पैदल राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है वहीं रात्रि के समय तो राहगीरों को यह खुले क्षतिग्रस्त नाले और भी ज्यादा परेशानी दे रहे है। जिससे किसी की भी इसके अंदर गिरने से मौत हो सकती है। इंतजाम के नाम पर सिर्फ लोहे की जाली डाल रखी हैं। तो कई नाले कचरे के अटे पड़े हैं। वहीं कई जगह पर अतिक्रमियों ने अपनी सुविधा के अनुसार तोड़ दिए फिर किसी को भनक नही लगे इसके लिए उन्होंने उन बरसाती नालों में रेत डलवाकर जमींदोज़ कर दिया, आगे बारिश का मौसम आ रहा हैं ऐसे में इन बरसाती नालों से जलनिकासी कैसे होगी, यह वाकई विचारणीय हैं।

फुटपाथ पर हार्डिंग की भरमार, राहगीरों का पैदल चलना हुआ दुश्वार

इसे सरकारी स्तर पर लचर व्यवस्था का परिणाम कहें तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नही होगी क्योंकि मायलावास चौराये से गुजरने वाले इस हाइवे पर साइड में बने बरसाती नालों पर निजी दुकानदारों ने अपने व्यवसाय के स्थाई होर्डिंग लगा दिए हैं। नियमानुसार यहां किसी भी निजी व्यवसाय, संस्थान या अन्य किसी का होर्डिंग नहीं लगाया जा सकता तथा इसके लिए केवल राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ही अधिकृत हैं जबकि नेशनल हाइवे 325 पर ऐसे कई होर्डिंग्स लगे हुए हैं। जिसके बारे में कई बार जिम्मेदारों को अवगत करवाया मगर अभी तक कोई कार्यवाही नही की गई।

बेरिकेट्स की सुध तक नही

यात्रियों की सुविधा व वाहनों की सेफ्टी के लिए हाइवे ऑथोरिटी ने मायलावास चौराया पर सड़क के दोनों तरफ बेरिकेट्स लगवाए थे लेकिन आज उन बेरिकेट्स को लोगों ने अपनी सुविधा के अनुसार तोड़ दिया हैं। जगह-जगह लंबे समय से वो बेरिकेट्स वहीं पड़े हुए नकारे साबित हो रहे हैं। उक्त उखड़े बेरिकेट्स यथा स्थान पर लगवाएं ऐसी पहल अभी तक तो नही देखी जा रही हैं। परिणामस्वरूप वो तमाम बेरिकेट्स आज जिम्मेवारों की बेपरवाही के चलते अर्थहीन साबित हो रहे हैं।

इनका कहना

नियमित देखरेख करें

सरकार टोल तो डंके की चोट पर वसूल कर रही हैं लेकिन नियमित देखभाल के अभाव में नेशनल हाइवे 325 बदहाल होता जा रहा हैं, जगह-जगह दिखाई पड़ रही अनियमितताएं किसी दिन हादसे का कारण बन सकती हैं, हाइवे ऑथोरिटी कार्यकारी एजेंसी को पाबंद करें और आमजन को हो रही तमाम समस्याओं का निस्तारण करवाने के लिए पाबंद करें।

एडवोकेट दिनेश भाटी

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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