लापरवाही: न बाईपास बना न ही लगे डिवाइडर, नगरपालिका प्रशासन बेपरवाह

लापरवाही: न बाईपास बना न ही लगे डिवाइडर, नगरपालिका प्रशासन बेपरवाह
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डेढ़ साल से नगरपालिका नही दे रही ध्यान, इधर जिला प्रशासन ने दे रखी है लापरवाही की खुली छूट

कस्बे के एनएच 325 पर यातायात अव्यवस्था बनी दुर्घटना का पर्याय, जिम्मेदार बेसुध

सिवाना

एनएच 325 बालोतरा से सांडेराव वाया सिवाना का निर्माण लगभग पूर्ण हुए 5 साल गुजरने के बावजूद अभी तक नेशनल हाईवे का आवागमन सिवाना कस्बे के अंदर से ही सिंगल रोड पर ही हो रहा है। जिम्मेदार विभाग द्वारा अभी तक बाईपास हाइवे का निर्माण नही करवाया है। एवं कस्बे के अंदर डिवाइडर लगाकर डबल रोड का निर्माण कार्य नही करवाया है। जिससे प्रतिदिन भारी वाहनों का कस्बे के अंदर से सिंगल रोड पर से गुजरने के कारण हर समय राहगीरों पर हादसे की तलवार लटक रही है। यातायात अव्यवस्था आमजन के लिए दुर्घटना का पर्याय बनती जा रही हैं। जबकि नगरपालिका प्रशासन कोई ध्यान नही दे रहा है यहाँ तक कि 35 किमी दूर बालोतरा जिला प्रशासन भी कोई कार्यवाही नही करते हुए नगरपालिका को अकर्मण्यता की मानो खुली छूट दे रखी है। कई बार यातायात जाम की स्थति पैदा होने पर आवागमन बाधित हो जाता है।आबादी क्षेत्र से गुजरने वाले एनएच 325 पर गति अवरोधक का निर्माण नही होने व सड़क सड़क भी टूटी फूटी होने साथ ही विभाग द्वारा वाहनों की आबादी क्षेत्र में गति नियंत्रण के लिए चेतावनी बोर्ड नही लगाने से वाहन बेकाबू गति से सरपट भागते हुए राहगीरों को चपेट में लेते हैं।आए दिन दुर्घटना में निर्दोष लोग शिकार होते हुए अपने हाथ पैर तुड़वाने पर मजबूर हैं।

 

आबादी में एक किमी तक यातायात व्यवस्था बदतर

कस्बे के पादरड़ी फांटा बालोतरा रोड़ से मोकलसर रोड चम्पावाड़ी जैन सस्थान तक एनएच 325 पर एक किमी दुरी में आबादी क्षेत्र होने के कारण आमजन की हर समय आवाजाही बनी रहती है। साथ ही हाइवे के दोनों तरफ आवासीय कॉलोनियां आबाद है। तथा एक दर्जन शिक्षण संस्थान, एक दर्जन सरकारी कार्यालय, आधा दर्जन धार्मिक स्थल, पोस्ट ऑफिस बैंकिंग सस्थाएं, व्यापारिक प्रतिष्ठान ,स्थापित होने से पैदल राहगीरों सहित आमजन का भारी आवागमन बना रहता है।इसके अलावा हाइवे को क्रॉस करने वाले एक दर्जन आबादी क्षेत्र के मार्ग भी है। हाइवे पर सरपट भागने वाले वाहनों की गति नियंत्रण के लिए विभागीय स्तर पर किसी भी प्रकार का चेतावनी संकेत बोर्ड व गति अवरोधक नही है। जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा राहगीरों व दुपहिया वाहन चालको पर बना रहता है।विशेषकर गांधी चौक पर यातायात जाम की स्थति ज्यादा बनी रहती है। कई बार जाम के कारण आपात सेवा के वाहनों का निकलना भी मुश्किल हो जाता है। बेतरतीब ढंग से इधर उधर सड़क किनारे वाहनों व खोमचों की पार्किंग के साथ ही अस्थाई रोडवेज व निजी बसों के स्टेंड थ्री व्हीलर स्टेंड होने के कारण हाइवे से निकलने वाले वाहनों को निकलने मे परेशानी उठानी पड़ती है। साथ ही गांधी चौक पर सब्जी मंडी व अन्य छोटे बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान स्थित होने से आमलोगों को आवागमन खरीददारी के लिए हाइवे पार करना मुश्किल हो जाता है। दुकानदारों दुआरा भी दुकानों के आगे सामान रखकर अस्थाई अतिक्रमण करने से हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

 

कई बार हो चुकी है दुर्घटनाएं

हाइवे पर अनियंत्रित यातायात के कारण कई बार छोटी बडी दुर्घटनाओं में निर्दोष लोग शिकार हो चुके हैं। एक पखवाड़े पूर्व सत्कार भवन मोकलसर रोड पर एक ट्रक ने राह चलते युवक को चपेट में ले लिया था।जिससे उसकी मौत हो गई है। इसी तरह तीन माह पूर्व बालोंतरा रोड पर मोटरसाईकल ने महिला को चपेट में लेेने से महिला की मोत हो गई थी। छ माह पूर्व हाइवे पर पोस्ट ऑफिस के सामने एक साथ चार वाहन आपस में भीड़ गए।गनीमत रही कि किसी को चोट नही लगी वाहनों को ही हानि पहुची। ऐसे हर बार हादसे होना आम बात हो गया है। वही सबसे खतरनाक एक्सीडेंट पॉइंट बने सत्कार कॉम्प्लेक्स के पास अनगिनत नाश्ते के खोमचों का जमघट हर समय बड़े हादसे को खुला निमंत्रण दे रहा है। यहाँ एक बेकाबू कार ने आठ महीने पूर्व दो राहगीरों को कुचलकर मोत की नींद सुला दिया था। यहाँ लगभग पिछले दो साल में दर्जनों छोटी मोटी दुर्घटनाए हो चुकी है।

 

मांग पर कार्यवाही नहीं

आबादी क्षेत्र से गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर बढ़ते यातायात दबाव को व्यवस्थित रूप से संचालन को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों को अवगत करवाया गया है।लेकिन कार्यवाही नहीं हो रही है। हाइवे पर निकलने वाले तेज गति से वाहनों के अंकुश लगाने के लिए गति अवरोधक बनाकर एवम यातायात नियमों के चेतावनी बोर्ड लगाकर कार्यवाही की जाए। 

मनोज भन्साली वार्ड पंच

बस स्टैंड पर बसों को करे पाबन्द

हाइवे पर अस्थाई बस स्टैंड हटाने के लिए सरकारी बसों का कस्बे के बस स्टैंड पर ठहराव को लेकर पाबन्द किया जाए।

मेहबूब खान सामाजिक कार्यकर्ता

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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