केवल हो रही है टोल वसूली, सड़क मेन्टेनेन्स के नाम पर दिखाया जा रहा है ठेंगा।

केवल हो रही है टोल वसूली, सड़क मेन्टेनेन्स के नाम पर दिखाया जा रहा है ठेंगा।
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नेशनल हाईवे 325, मोकलसर गांव में हुआ जानलेवा गड्डो में तब्दील

बेवजह लटकाने से समय पर शुरू नही हो पाया सिवाना मोकलसर बाईपास का निर्माण।

अब खामियाजा भुगत रहे हैं ग्रामीण।

मोकलसर

नेशनल हाईवे 325 का निर्माण हुए लगभग सात से दस साल हो गया है। लेकिन इस हाइवे में प्रस्तावित सिवाना व मोकलसर बाईपास का निर्माण कार्य अभी तक पूर्ण नही होने के कारण उक्त हाइवे सिवाना व मोकलसर वासियो सहित प्रतिदिन गुजरने वाले सेकड़ो वाहनचालकों के लिए नासूर जैसी समस्या बना हुआ है। विशेषकर मोकलसर गांव से गुजरने वाले इस हाइवे पर मोकलसर गांव से दो किमी दूरी तक सड़क टूटकर जानलेवा गड्डो में बदल गई हैं। सड़क पर गहरे-गहरे गड्ढे बने हुए हैं, जिसमें जलभराव होने की वजह से गहराई का अंदाजा नही लग रहा हैं। कभी भी वाहन पलट जाए कोई भरोसा नही है। इन गड्डो में ज्यादा दिनों तक पानी का भराव होने की वजह से मच्छर पनप रहे हैं। हाइवे के आस पास रहने वाले लोगों के बीमारियों का कारण बन रहे हैं। यहां आए दिन वाहन चालक चोटिल हो रहे हैं। वहीं सूखे की स्थिति में रेत के गुब्बार उड़ते रहते हैं। लेकिन इन तमाम समस्याओं से निजात दिलाने की दिशा में जिम्मेवारों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा हैं। इससे साफ प्रतीत होता हैं कि इन्हें जनता के दर्द से कोई सरोकार नही हैं। दरअसल सिवाना उपखंड क्षेत्र के मोकलसर गांव स्थित गौर के चौक के पास स्थिति बेहद खराब हैं।

 

 सड़क मेन्टेनेन्स के नाम पर दिखाया जा रहा है ठेंगा।

जबकि एनएच विभाग केवल टोल वसूली करने में लगा हुआ है।आमजन को सड़क मेन्टेनेन्स के नाम पर ठेंगा दिखाया जा रहा है। नरसाणा पर बने टोल प्लाजा पर डंके की चोट पर टोल वसूली की जा रही हैं। हालात यह हैं कि वाहनों का तो क्या आमजन का पैदल चलना भी दूभर हो गया हैं। जबकि यह नेशनल हाईवे 325 हैं, हालांकि बाईपास बन रहा हैं लेकिन वर्तमान में जिस रुट से यातायात संचालित हो रहा हैं वहां कोई ध्यान नही दिया जा रहा हैं। ऐसा भी नही है कि जिम्मेदार विभाग, प्रशासन या जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी नहीं है। इसकी मरम्मत करवाने को लेकर कई बार मांग की गई। मगर जिम्मेवारों द्वारा पुख्ता इंतजाम करने की बजाय हर बार मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति ही कि जा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है। कि नालियों से निकले वाले गन्दे पानी का सड़क पर फैलाव होने के कारण सड़कों का टूटना लाजमी है। लेकिन पिछले लंबे समय से आमजन व वाहन चालकों को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वाहन चालकों की मानें तो विभाग या ग्राम पंचायत द्वारा गांव के अंदर से गुजर रहे एक किमी दूरी तक सीसी रोड बनवाकर आमजन को राहत दी जा सकती हैं। लेकिन अभी तक इस और कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यहां का विभाग न तो दर्द समझ रहा है और न ही जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान दे रहे है। ऐसे में कस्बेवासियों व वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

 

बढ़ता दुर्घटनाओं का ग्राफ, आँखे मूंदे बैठे सरकारी कारिंदे।

बीते एक साल में मोकलसर गाँव से गुजरने वाले नेशनल हाईवे बालोतरा सांडेराव पर लगातार दुर्घटनाओं में इजाफा हुआ है। वही सड़क पर गड्ढों होने से वाहन चालकों ध्यान नहीं रहता जिससे वह दूसरे वाहनों से टकरा कर चोटिल हो रहे हैं। वही वाहनों को भी भारी नुकसान हो रहा है। वाहन चालकों के मुताबिक दिन के समय भी सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। गड्ढों में पड़े दूषित पानी के छींटे पैदल चलने वाले राहगीरों पर उछल रहे हैं। ये गड्ढे कब हादसे का सबब बन जाएं इस पर कुछ कहा नही जा सकता। गौरतलब हैं कि इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं, बावजूद इसके समाधान की दिशा में कोई कदम नही उठाना जिम्मेवारों की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा हैं। फिर भी आमजन को राहत दिलाने वाले कारिंदों ने आंखे बंद कर रखी हैं।

 

राजस्व विभाग द्वारा बेवजह लटकाने से समय पर शुरू नही हो पाया बाईपास का निर्माण।

नेशनल हाईवे 325 बालोतरा जालोर सांडेराव पर सिवाना व मोकलसर बाईपास का निर्माण लम्बे समय से कछुआ चाल चल रहा है। पांच साल तक तो बाईपास कार्य व भूमि सेटलमेंट व किसानों के मुआवजे की प्रक्रिया अपने एलम के लिए राजस्व अधिकारियों ने कागजो में उलझा कर रखी। उपखण्ड के बदलते जिम्मेदार राजस्व अधिकारियों द्वारा समय पर किसानों से समझाइश नही कर पाने के कारण कई किसानों ने ज्यादा मुआवजा राशि पाने के चक्कर मे स्थगन आदेश ले आए। तो कई किसान बाईपास निर्माण मेंजो अपनी जमीन गंवा चुके उक्त किसान मुआवजा राशि पाने के लिए पटवारी से लेकर उपखण्ड कार्यालयों के चक्कर काटते रहे। लेकिन विभागों में बैठे सरकारी कारिंदों ने जानबूझकर उन्हें भटकाते रहे ताकि कुछ मलाई मार सके। जिससे सिवाना व मोकलसर बाईपास का कार्य अधरझूल में लटक गया। महज सात महीने पूर्व ही तेजगति से कार्य शुरू हो पाया है।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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