चिकित्सा विभाग की अंधेरगर्दी का खामियाजा भुगत रहे मरीज

चिकित्सा विभाग की अंधेरगर्दी का खामियाजा भुगत रहे मरीज
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5 माह से चिकित्सक का पद रिक्त, इलाज के लिए भटक रहे मरीज

मोकलसर

मरीज दर्द से कराह रहे हैं, वहीं जनता जनप्रतिनिधियों व चिकित्सा विभाग के अधिकारियों से यहां कम से कम एक चिकित्सक लगाने की मांग कर रहे हैं, मगर 5 माह बीत जाने के बाद भी कोई सुनवाई नही होना, यह आश्चर्य का विषय हैं। जिम्मेवारों के उदासीन रवैये के चलते चिकित्सा सेवा में कोई सुधार के प्रयास नजर नही आ रहे हैं। सिवाना उपखंड क्षेत्र के एनएच 325 पर स्थित राजकीय दरजानी चिकित्सालय मोकलसर के भरोसे मायलावास, रमणिया, मोतीसरा, काठाड़ी, धीरा, कुंडल, डाबली, राखी सहित दर्जनभर गांवो के 50 हजार से ज्यादा लोग हैं। अस्पताल में ओपीडी के दौरान आधी से अधिक भीड़ महिलाओं और बच्चों की होती हैं। ऐसे में ग्रामीण इस बार क्षेत्र के एकमात्र चिकित्सालय में महिला चिकित्सक लगाने की मांग कर रहे हैं। उल्लेखनीय हैं कि मोकलसर के राजकीय प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र पर कार्यरत चिकित्सक डॉ आकाश बोड़ा का तबादला दूसरी जगह होने से यहाँ के मरीज नर्स और कम्पाउंडरो के भरोसे इलाज करवा रहे हैं। हर बार राज्य सरकार का बजट पारित होने से पहले ग्रामीण उम्मीदे लगाते हैं लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगती है। बता दें कि मायलावास-मोकलसर क्षेत्र सिवाना उपखण्ड का सबसे बड़ा क्षेत्र है। ऐसे में यहां चिकित्सा, शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं के बेहतर होने की उम्मीद रहती है। लेकिन यहां चिकित्सा सुविधा बेहतर नही है। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र और जनसंख्या के अनुसार इस पीएससी को सीएससी में क्रमोन्नत कर सुविधाओं का विस्तार होना चाहिए। सीएससी बनने पर स्टाफ और चिकित्सक लगने से समय पर लोगो को इलाज मिल जाएगा, लेकिन लम्बे समय से मांग के बावजूद सरकार इस ओर ध्यान नही दे रही है।वर्तमान में मोकलसर स्थित प्राथमिक चिकित्सालय में एक भी चिकित्सक कार्यरत नही हैं, ऐसे में मरीज अपना इलाज कम्पाउंडरो और नर्सो से करवा रहे हैं।

 

दर्जनों गांवों को इस अस्पताल से रहती हैं उम्मीद

मायलावास-मोकलसर क्षेत्र के रमणिया, काठाड़ी, धीरा, कुंडल, मोतीसरा, डाबली, सेवाली, राखी, वालू सहित 25 से अधिक गांवो, ढाणियों के ग्रामीण उपचार करवाने कस्बे के चिकित्सालय पहुचते है। लेकिन यहां प्रयाप्त चिकित्सक व सुविधाए नही होने पर लोगो को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं दुर्घटनाओं में घायलो को 10 से 30 किमी सिवाना, 50 से 100 किमी दूर बालोतरा ले जाना पड़ता है।अधिक दूरी और खस्ताहाल सड़को पर पहुचने में कई घण्टे लग जाते हैं। इस पर कई बार मरीज की जान पर बन आती है।

 

महिला चिकित्सक नही पुरुष चिकित्सक करवाते हैं डिलीवरी

क्षेत्र का एकमात्र प्राथमिक चिकित्सालय में एक पुरुष चिकित्सक कार्यरत थे।चिकित्सालय में प्रतिमाह दर्जनभर गर्भवती महिलाओं की यहां डिलीवरी होती है। लेकिन महिला चिकित्सक के नही होने के कारण महिलाओं की डिलीवरी पुरुष चिकित्सक के द्वारा की जाती है। महिला चिकित्सक नही होने के कारण महिलाओं को अपनी पीड़ा बताने में काफी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।

 

आखिर सुनवाई क्यों नही?

एक तो यह अस्पताल एनएच 325 पर स्थित हैं, जहां आए दिन हादसे होते रहते हैं, ऐसे में कंपाउंडरों से जितना बन सकता हैं वो इलाज करते हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यह कि आखिर इतने बड़े अस्पताल पर एक भी चिकित्सक क्यों नही, ऐसा भी नही की चिकित्सा महकमा व जनप्रतिनिधि इस बारे में अनभिज्ञ हो। आखिर क्या वजह हैं कि इतनी बड़ी जन समस्या को अनदेखा किया जा रहा हैं, जनता का आक्रोश फुट रहा हैं, जनता कब वोट के प्रहार से करारा जवाब दें इस पर कुछ कहा नही जा सकता।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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