फूलन सरपंच मोहनी देवी विश्नोई ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को लिखा पत्र

फूलन सरपंच मोहनी देवी विश्नोई ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को लिखा पत्र
Spread the love

 डीम्ड फारेस्ट में भूमि नही देने की मांग की

समदड़ी 

सिवाना उपखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत फूलण सरपंच मोहनी देवी विश्नोई ने उप प्रधान मुख्य वन संरक्षक को पत्र लिखा। पत्र में बताया कि ग्राम पंचायत की औरण और पारिस्थितिकी भूमि डीम्ड फोरेस्ट घोषित नहीं की जाए। पत्र में बताया कि माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार ओरण एवं पारिस्थतिकी क्षेत्रों को डीम्ड फॉरेस्ट घोषित किये जाने संबंधित विज्ञप्ति के संबंध में आपत्ति मांगी गई थी। आदेश में राजस्थान के बालोतरा जिला के लिए निकाली गई विज्ञप्ति की सूची के क्रम संख्या 766,767, 768 व 769 पर समदड़ी तहसील के फूलण गाँव की गैर मुमकिन ओरण भूमि के खसरा संख्या 16 की 4.14 हेक्टेयर, खसरा संख्या 207 की 62.08 ठेवटेवर, सासरा संख्या 372/202 की 65.02 हेक्टेयर एवं डासरा संख्या 561/125 की 251.19 हेक्टेयर भूमि को डीम्ड फॉरेस्ट घोषित किया जाता प्रस्तावित है। पत्र में बताया कि ओरण भूमि के संबंध में ग्रामीणजन की मान्यता रही है कि ओरण भूमि देवताओं की भूमि है। जहां देवता निवास करते हैं और इसी आस्था के कारण उक्त भूमि पर कब्जा जमाना तो दूर इस भूमि से कोई वृक्ष नहीं काटता है। यहाँ की धूल अपने घरों तक ले जाना पाप समझा जाता है इस भूमि की ग्रामीणों द्वारा पूजा की जाति है। जनता स्वयं इस भूमि की संरक्षक है और अब सरकार ने इस देवीय भूमि को डीम्ड फॉरेस्ट घोषित किये जाने का फरमान जारी किया है इसका हम ग्रामीण जनता घोर विरोध करते हैं। इसी भूमि में सैकड़ों वर्षों पूर्व बने नाडी तालाब है जिससे ग्रामीणों के मवेशी अपनी प्यास बुझाते हैं और यदि इस भूमि को डीम्ड फॉरेस्ट घोषित किया जाता है तो फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के नियमों के तहत ग्रामीणों को उक्त सुविधाओं से वंचित होना पड़ेगा। इसी ओरण भूमि में ग्रामीणों के आराध्य देवों के मंदिर बने हुए है आज विभिन्न जाति जनजाति आदिवासी लोग अपने आस्था के स्थानों पर जाने जाने से वंचित हो जाएंगे। इसी ओरण भूमि में विभिन्न जाति जनजाति समूहों के लिए अंतिम यात्रा संस्कार हेतु श्मशान भूमि का उपयोग सदियों पूर्व से किया जाता रहा है जिसमें अलग अलग जातियों के रिवाज अनुसार अग्नि संस्कार व भूमि में गाढ़ने का अंतिम संस्कार किया जाता है और इस पवित्र कार्य हेतु ग्रामीणों के पास कोई सार्वजनिक भूमि उपलब्ध नहीं है और यदि इस भूमि को डीम्ड फॉरेस्ट घोषित किया जाता है तो फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के नियमों के तहत ग्रामीणों को बहुत ज्यादा समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। ग्राम पंचायत फूलन की ओरण भूमि में सदियों पहले से आदिवासी व घुमक्कड जाति के लोग स्थाई रूप से पक्के मकान बनाकर रह रहे है। भूमि को आबादी में परिवर्तित नहीं कर पाने के कारण गरीब जनता को आने वाले समय में विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। सरकार वर्षों पूर्व ओरण भूमि में बसे हुए लोगों के जावासों का नियमन करें। इनके भूमिहीन होने की संभावना है।

 

कानून में करें संसोधन जिससे लोगों को मिले राहत

पत्र में बताया कि भविष्य में ग्राम पंचायत के पास सार्वजिक सुविधाओं के लिए सरकारी भवन हेतु जैसे अस्पताल, डाकार, मिनी बैंक, अटल सेवा केंद्र, किसान सेवा केंद्र, पशु औषधालय, गौशाला आदि बनाने हेतु भूमि उपलब्ध नहीं है ग्रामीण जनता के जीवन यापन का मुख्य स्त्रोत पशुधन जैसे भेड़, बकरी, गाय, भैंस आदि के लिए चारागाह खत्म हो जाएगा, इसलिए ओरण भूमि नियमन के कानून में आवश्यक बदलाव करवाकर ग्राम पंचायत को पर्याप्त भूमि जावंटित किये जाने के बाद ही शेष भूमि को डीम्ड फॉरेस्ट घोषित किया जाए, ताकि जनता को परेशानी का सामना नही करना पड़ें।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

Related articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Don`t copy text!