कविता – आखिरी महीना दिसंबर है।

कविता – आखिरी महीना दिसंबर है।
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हवाएं चली, सर्दी बढ़ी, दिसंबर की रातें,

साल की कहानी लिपटी, बीते वक़्त की बातें।

फूलों ने खो दिया अपना रंग, पत्तियाँ हुईं सूखी,

आसमान में छाई ठंडक, बर्फ ने बिछा दी चादर। 

 

दिलों में बसी उम्मीद, नए साल का आगमन,

खुशियाँ बिखरें इस दिसंबर के ख्वाबों में।

खूबसूरती बढ़ने लगती सर्दी के मौसम संग,

अकेले नहीं सर्दियों वाली दिसंबर की रातें हैं संग। 

 

सितारों की रंगत में छुपा हुआ है,

आखिरी महीना, प्यार से भरा सफर है। 

कहानियों का सफर समाप्त होने को है,

चलो मिलकर, हम यह पल बिताते हैं। 

 

बर्फबारी से ढका सारा दृश्य,

कह रहा है वक़्त, सुनो इस अब।

गुजरे साल की कहानी हैं यह,

अनछुए सपने, भुलाएं बेकार की बातें। 

कवि – अनुराग उपाध्याय

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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