धर्म आस्था: हाळी अमावस्या पर घरों में किया खळ पूजन, सुकाळ के देखे शगुन

धर्म आस्था: हाळी अमावस्या पर घरों में किया खळ पूजन, सुकाळ के देखे शगुन
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ग्रामीण क्षेत्रों में सदियों से चली आ रही परंपरा का आज भी लोग करते हैं निर्वहन 

मोकलसर

सिवाना उपखंड क्षेत्र के मोकलसर कस्बे सहित ग्रामीण क्षेत्र में बुधवार को हाळी अमावस्या मनाई गई। लोगों ने घरों में खळ पूजन किया, वहीं मंदिरों में भी दान-पुण्य के दौरान महिलाओं की अच्छी भीड़ दिखाई दी। इसके साथ ही किसानों ने हाळी अमावस्या पर शगुन देखकर आगामी अच्छे जमाने की आस लगाई। हाळी अमावस्या पर सुबह से ही गांवों के मंदिरों में महिलाओं का तांता लग गया। कथा के पश्चात गांव में दान-पुण्य का सिलसिला पूरे दिन चलता रहा। इसी कड़ी में मोकलसर कस्बे में बुधवार को हाळी अमावस्या का पर्व बड़े उत्साहपूर्वक मनाया गया। बैशाख वदी अमावस्या पर प्राचीन काल से हाळी अर्थात हलधर के नाम से हाली अमावस्या के रूप में मनाया गया। इस त्योहार से बच्चे, बूढ़े और जवान सभी का सीधा जुड़ाव हुआ। सूजाराम देवासी, गोबर राम सुथार, सवाराम प्रजापत, नारायण राम घांची, सुरपाल सिंह बालावत, फूलाराम सुथार, मेरामाराम प्रजापत, भगाराम सुथार, धनाराम दर्जी, इंद्र राम दर्जी, गणपत भाटी, धरमाराम सुथार, ओमाराम सुथार सहित कई किसान मौजूद रहें।

 

शुगुन देखकर सुकाल के लगाए कयास

इस दौरान आगामी मानसून में सुकाल के संबंध में कयास लगाए गए। बुजुर्गों के साथ-साथ युवा और बच्चे भी उपस्थित थे। युवाओं व बच्चों ने बुजुर्गों से प्राचीन समय से आ रही इस प्रथा के संबंध में जानकारी ली तथा सुकाल जानने के हुनर के गुर जाने। परंपरागत रीति-रिवाजों को अनवरत जारी रखने के लिए कस्बे में बच्चों ने मिलजुलकर खेतों में हल जोता गया। वही ग्रामीणों ने मिट्टी के कुलहड़ में पानी भरकर अच्छे जमाने के कयास लगाए।

 

स्त्रियां बनाती हैं खीच

हाळी अमावस्या की सदियों से चली आ रही प्रथा के अनुसार कस्बे की सभी स्त्रियां रात में सोने से पहले बाजरी, मूंग, मोठ को बड़े बर्तन में भीगो कर रखती हैं। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर ओखली में उसे छड़ती हैं तथा इन सभी खाद्यान्नों को मिलाकर खींच बनाती हैं, साथ ही घरों में ग्वारफली की सब्जी व कढ़ी आदि कई प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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