लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी रोशनी से नही जगमगाया रीको क्षेत्र

लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी रोशनी से नही जगमगाया रीको क्षेत्र
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शोपीस साबित हो रही एलईडी स्ट्रीट लाइट, आज भी रात में पसरा रहता हैं

मायलावास

नेशनल हाईवे 325 पर वर्षों से वीरान पड़े मोकलसर औद्योगिक क्षेत्र को गुलजार करने की मंशा से करोड़ो रूपये खर्च कर यहाँ सड़क, चारदीवारी व एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं। लेकिन इसको लगने के कई समय बीत जाने के बाद भी यहां लगी लाइटों को अभी तक शुरू नही किया गया हैं। जिससे आज भी यहाँ रात के समय अंधेरा पसरा रहता हैं। गौरतलब हैं कि पूर्व राजसिको निदेशक सुनील परिहार के प्रयासों से यहां सड़क निर्माण के लिए 77.69, चारदीवारी के लिए 31.95 व एलईडी स्ट्रीट लाइट के लिए बजट आवंटित करवा गया था। जिसमें सड़क निर्माण व चारदीवारी का कार्य तो पूरा हो गया हैं लेकिन लाइट के लिए पोल तो लगा दिए गए हैं मगर अभी तक इन्हें शुरू नही करने की वजह से हालात यथावत बने हुए हैं। नतीजन वो एलईडी लाइट महज शोपीस बनी हुई है। लाइटें शुरू नही होने की वजह से अंधेरा पसरा रहता हैं जिससे आमजन को भय सताता रहता हैं। वहीं रखरखाव व देखरेख नही होने की वजह से शरारती तत्वों ने पोल को क्षतिग्रस्त भी कर दिया हैं। ग्रामीणों ने बताया कि रीको में जहां-जहां सड़क का निर्माण करवाया गया वहाँ-वहाँ स्ट्रीट लाइट के पोल तो लगा दिए हैं लेकिन अभी तक इन्हें शुरू नही करने की वजह से आज भी यहां पहले जैसे ही हालात बने हुए हैं। उल्लेखनीय हैं कि पास में मंदिर होने की वजह भक्तों का आवागमन होता रहता हैं। ऐसे में अंधेरे की वजह से उन्हें डर सताता रहता हैं। आमजन को हो रही समस्या को लेकर संवाददाता ने विभाग के अधिकारी को कॉल किया मगर उन्होंने कॉल रिसीव करने की जहमत नही उठाई।

 

जिम्मेदार गंभीर नही?

बता दें कि यहां सड़क व चारदीवारी निर्माण के दौरान ग्रमीणों द्वारा निर्माण कार्य में बरती जा रही शिथिलता को लेकर शिकायत की गई थी। जिस पर इन्हें पुनः ठीक कर दिया गया था और अब यह स्ट्रीट लाइट के पोल तो लग गए हैं लेकिन इन्हें अभी भी शुरू नही किया गया गया हैं। नतीजन स्थिति पहले जैसे ही बनी हुई हैं। रोशनी के अभाव में रात के अंधेरे में शरारती तत्व अनैतिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं। ऐसे में अगर इन लाइटों को शुरू किया जाएं तो जहां आमजन को राहत मिलेगी वहीं रीको क्षेत्र गुलजार हो पाएगा।

 

दिनभर रहती हैं चहलकदमी

गौरतलब हैं कि यहाँ मां चामुंडा, खेतजाली व मामा मामी का मंदिर हैं, इसलिए बाहर से आये हुए भक्त एक मंदिर से दूसरे मंदिर इसी रुट से निकलते हैं। अभी शुक्ल माह का महीना होने की वजह से सुबह से लेकर देर शाम तक भक्तों का पैदल आवागमन होता रहता हैं। नेशनल हाइवे होने की वजह से यहां आमजन की दिनभर चहलकदमी होती रहती हैं। वहीं पहाड़ी क्षेत्र होने की वजह जहरीले जीव सड़को पर विचरण करते रहते हैं। ऐसे में अगर इन लाइटों को शुरू किया जाएं तो यहाँ पंहुचने वाले भक्तों में डर कम होगा। क्योंकि ज्यादातर भक्त एक मंदिर से दूसरे मंदिर नंगे पैर ही सफर करते हैं।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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