एकीकरण के नाम पर बंद स्कूलें आज लावारिस हाल में

एकीकरण के नाम पर बंद स्कूलें आज लावारिस हाल में
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देखरेख के अभाव में आवारा पशुओं व समाजकंटकों के लिए बने आश्रय स्थल

मायलावास

शिक्षा विभाग की ओर से राजकीय विद्यालयों के एकीकरण की प्रक्रिया के अंतर्गत क्षेत्र के कई विद्यालयों को बंद किया गया था। इन विद्यालयों को अभी तक नहीं खोला गया है। इस कारण आसपास के बच्चों को दूसरे स्कूलों में जाना पड़ता है। यह विद्यालय वापस शुरू कर दिए जाए तो अन्य सरकारी विद्यालयों पर दबाव भी कम हो सकता है। उल्लेखनीय हैं कि शिक्षा विभाग की ओर से एकीकरण की प्रक्रिया के अंतर्गत क्षेत्र के कई विद्यालयों को बंद किया गया था। तब से यह विद्यालय अभी तक बंद ही पड़े है। इन विद्यालयों का संचालन वापस शुरू कर दिया जाए तो आसपास के बालक बालिकाओं को निजी स्कूलों में और दूर के सरकारी विद्यालयों में नहीं जाना पड़ेगा।

देखरेख के अभाव में समाजकंटकों के बने आश्रय स्थल

इन बंद पड़े विद्यालयों की देखरेख नही होने की वजह से अब यह भवन बेसहारा पशुओं व समाजकंटकों की शरण स्थली बने हुए हैं। अधिकांश भवनों के मुख्य द्वार खुले होने पर बेसहारा पशु दिन में यहां सुस्ताते हैं। रात्रि में यहां समाजकंट एकत्रित हो जाते हैं। वहीं, शराबियों के लिए भी ये भवन आश्रय स्थल बन गए हैं। इस पर आसपास के घरों के लोग डरे सहमे रहते हैं।

 

खुले तो मिले बच्चों को लाभ

दरअसल राजकीय विद्यालयों में साल दर साल विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा हो रहा हैं। ऐसे में इन विद्यालयों की मरम्मत कर इनमे अध्यापन कार्य पुन: शुरू कर दिया जाए तो आसपास के बच्चों को लाभ मिलेगा। और इन बच्चों को पढऩे के लिए लंबी दूरी तय नही करनी पड़ेगी।

 

कौन करें पैरवी

इन भवनों के रख-रखाव या अन्य सरकारी विभागों को हस्तांतरित करने को लेकर पैरवी की जरूरत हैं। राज्य स्तर पर जनप्रतिनिधि पैरवी करे तो इसका समाधान निकल सकता हैं। बावजूद इसके कोई ध्यान नहीं दे रहा। जिसके चलते लाखों रुपए की सरकारी सम्पत्ति धीरे-धीरे जर्जर होती जा रही हैं।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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