खरण्टिया मठ में आयोजित जूना अखाडे के अखिल भारतीय संत सम्मेलन में शंकराचार्य जयंती धूमधाम से मनाई गई।

खरण्टिया मठ में आयोजित जूना अखाडे के अखिल भारतीय संत सम्मेलन में शंकराचार्य जयंती धूमधाम से मनाई गई।
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खरण्टिया मठ के महंत किशन भारती को पीर की पदवी से किया सम्मानित

खरण्टिया मठ का हजारों वर्षो से हिंदू सनातन धर्म को मजबूत करने में रहा है अहम योगदान – नरेंद्रानन्द सरस्वती।

बालोतरा

 जिले के खरण्टिया मठ में आयोजित जूना अखाडे के अखिल भारतीय संत सम्मेलन के तीसरे दिन शंकराचार्य जयंती धूमधाम से मनाई गई। साथ उपस्थित अग्रणीय सन्त महात्माओं ने खरण्टिया मठ के महंत तथा जोगेंद्र पीर की परम्परा के पीर किशन भारती महाराज को पीर की पदवी से सम्मानित किया गया। उनका विधिवत रूप से अभिषेक व पूजन भी किया गया। ऊर्ध्वाम्नाय श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज, जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज, जूना अखाड़ा के वर्तमान अंतरराष्ट्रीय सभापति अध्यक्ष श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज व श्रीपंच दशनाम जूना अखाडा के अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता, दिल्ली संत महामंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व हिंदू यूनाइटिड फ्रंट के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने उन्हें सिंहासन पर आसीन कर छत्र व छडी देकर पीर की पदवी से सम्मानित किया। राजा-महाराजाओं द्वारा उन्हें पहले से ही पीर की पदवी दी जा चुकी है। सम्मेलन के तीसरे दिन जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने भलरों का वाड़ा में महादेव पूजन, सारणेश्वर महादेव पूजन पाठ किया। खरण्टिया मठ में गौरी गणेश पूजन, कलश पूजन, नवग्रह पूजन, वास्तु पूजन, गुरू दत्तात्रेय पूजन, हनुमान पूजन, क्षेत्रपाल पूजन, शंकराचार्य जयंती पर शंकराचार्य पूजन, अन्नपूर्णा पूजन व हवन हुआ। षोडष मंत्रों से महादेव का अभिषेक किया गया। जोगेंद्र भारती, उनके गुरू समेत सभी गुरू मूर्तियों की समाधियों का पूजन हुआ और फूल व फल अर्पित किए गए। उसके बाद महंत किशन भारती महाराज को जूना अखाडे द्वारा पीर की पदवी से सम्मानित किया गया।

 

 हिंदू सनातन धर्म को मजबूत करने में हजारों वर्षो से खरण्टिया मठ का अहम योगदान – नरेंद्रानन्द सरस्वती

 कार्यक्रम के दौरान उदबोधन में कहा कि ऊर्ध्वाम्नाय श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि खरण्टिया मठ हजारों वर्षो से भारतीय संस्कृति, सभ्यता, विरासत, धरोहर को सहेजने का कार्य कर रहा है। हिंदू सनातन धर्म को मजबूत करने में इस मठ का अहम योगदान है। इस मठ में जोगेंद्र भारती जैसे चमत्कारी व सिद्ध संत हुए जिनके चर्चे आज भी पूरे विश्व में होते हैं। श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि खरण्टिया मठ के वर्तमान महंत किशन भारती महाराज जोगेंद्र भारती महाराज की परम्परा को आगे बढाते हुए सनातन धर्म की पताका फहराने के साथ परोपकार के कार्यो में भी लगे हुए हैं। उनके इन महान कार्यो के चलते ही जूना अखाडे द्वारा उन्हें पीर की पदवी से सम्मानित किया गया है। श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज ने कहा कि खरण्टिया मठ अपनी स्थापना से ही समाज का मार्गदर्शन करता आ रहा है। मठ में ऐसे संत अवतरित हुए जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। महंत किशन भारती महाराज भी धर्म की रक्षा व सनातन धर्म की पताका पूरे विश्व में फहराने के लिए पूरी तरह से समर्पित हैं। इसी क्रम में श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि खरण्टिया मठ ने आतताईयों के आक्रमण से धर्म की जिस प्रकार रक्षा की, उसकी आज पूरे विश्व में मिसाल दी जाती है। मठ में जोगेंद्र भारती जैसे सिद्ध, तपस्वी, महान व चमत्कारी संत हुए जिनके आगे आतताईयों ने भी अपना मस्तक झुका लिया था। महंत किशन भारती महाराज उन्हीं की परम्परा को आगे बढाते हुए धर्म की रक्षा के लिए पूरी तरह से समर्पित हैं। आज देश को उन जैसे संतों की ही जरूरत है। इसी क्रम में सभापति श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज, श्रीमहंत निरंजन भारती महाराज, श्रीमहंत मोहन भारती महाराज, पूर्व सभापति श्रीमहंत उमाशंकर भारती महाराज, श्रीमहंत शैलेंद्र गिरि महाराज, श्रीमहंत रामचंद्र गिरि महाराज, श्रीमहंत रामेश्वर गिरि महाराज, श्रीमहंत धनंजय गिरि महाराज, महंत शम्भू गिरि महाराज, श्रीमहंत उमांकात गिरि महाराज, थानापति आदित्य गिरि महाराज, थानापति हरिशरण वन महाराज, महंत सनातन गिरि महाराज, श्रीमहंत बिशंभर भारती महाराज, महंत किशन गिरि महाराज, महत नीलकंठ गिरि महााज, श्रीमहंत केदारपुरी महाराज, श्रीमहंत हीरापुरी महाराज, श्रीमहंत महेश पुरी महाराज, श्रीमहंत पुज पुरी महाराज, श्रीमहंत कुश पुरी महाराज, अष्ट कौशल महंत शिव चेतन पुरी महाराज, अष्टकौशल महंत मृत्युंजय पुरी महाराज, श्रीमहंत मगन पुरी महाराज, श्रीमहंत शिवानंद पुरी महाराज, धवल पुरी महाराज गुजरात, थानापति भुवनेश्वर पुरी महाराज, थानापति सुरेश पुरी महाराज, श्रीमहंत जगदीश पुरी महाराज, महंत महादेव पुरी महाराज, महंत राघव पुरी महाराज, महंत गणेश पुरी महाराज, महंत जनक पुरी महाराज, श्रीमहंत वेद व्यास पुरी महाराज, महंत रमेश पुरी महाराज, मुनिश्वर गिरि महाराज, ऋषि भारती महाराज, शिव गिरि महाराज, योगेश्वरानंद गिरि महाराज, उमाकांत गिरि महाराज, श्रीमहंत पृथ्वी गिरि महाराज, श्रीमहंत शांति गिरि महाराज, महंत संध्या गिरि महाराज, श्रीमहंत बलवान गिरि महाराज, महंत गिरिशानंद गिरि महाराज, महंत आनंदेश्वरानंद गिरि महाराज, महंत रतन गिरि महाराज, महंत संजय गिरि महाराज, महंत रमेशानंद गिरि महाराज, श्रीमहंत रामेश्वर गिरि महाराज, श्रीमहंत देव गिरि महाराज, श्रीमहंत बाबू गिरि महाराज, श्रीमहंत सत्यम गिरि महाराज, श्रीमहंत भुवनेश्वर गिरि महाराज, पूर्व विधायक कान सिंह कोठरी, अजय सिंह ठाकुर साहब धुधाडा रामपुर ठाकुर साहब आदि समेत हजारों संत व श्रद्धालु मौजूद रहे।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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