जर्जर विधुत तंत्र दे रहा है जवाब, हर साल रखरखाव के नाम पर खर्च होते हैं लाखों रुपए।

जर्जर विधुत तंत्र दे रहा है जवाब, हर साल रखरखाव के नाम पर खर्च होते हैं लाखों रुपए।
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सिवाना

कस्बे में वर्षो पुराने विधुत तंत्र के सुधार को लेकर लम्बे समय से ठोस उपाय नहीं हो पाने के कारण फाल्ट के नाम पर कटौती होने की समस्या से लोग परेशान हैं । इधर डिस्कॉम में प्रतिवर्ष लाखों रुपए रखरखाव के नाम पर खर्च होने के बावजूद व्यवस्था में सुधार नही होने से लोगो के जेहन में यह प्रशन पैदा होता है कि आखिर रखरखाव का बजट कौन डकार रहा है। वर्षो पुरानी बिच्छाई गई विधुत लाइने व जर्जर पोल विधुत कटौती में सबसे बड़े बाधक बने हुए हैं ।ऊपर से डिस्कॉम में कार्मिको की कमी आग में घी का काम कर रही है ।कभी तार टूटने तो कभी पोल गिरने की घटनाओं से घण्टो तक विधुत कटौती की समस्या से लोगो को परेशानी उठानी पड़ रही है। कस्बे के मोकलसर रोड पर एलआईसी ऑफिस के सामने जर्जर विधुत पोल हादसे को न्योता दे रहा है। डिस्कॉम ने जर्जर पोल को बदलने की जगह नए पोल को ही इसके स्पॉट में लगा दिया। वही कस्बे में एक अन्य जगह पर जर्जर पोल को बदलना मुनासिब नहीं समझते हुए तारो से जकड़ दिया। इसी तरह सेला की वास कॉर्नर पर वर्षो पुराने लगे ट्रांसफार्मर का स्टैंड दरक चुका है कभी भी बड़े हादसे को जन्म दे सकता है। ऐसे जर्जर पोल कस्बे के एक दर्जन विभिन्न मोहल्लों में हादसे को न्योता दे रहे हैं।साथ ही पुराने तार नही बदले जाने से हल्की बारिश व हवा में टूटकर गिर जाते हैं जिससे घण्टो विधुत सप्लाई बंद रहती है। 

 ठोस उपाय नही

कस्बे में वर्षो पुरानी जर्जर विधुत लाइने व पोल नही बदलने से थोड़ी सी बारिश व हवा में तार टूटने सहित फाल्ट होते रहते हैं जिससे विधुत कटौती होने से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।ठोस उपाय नही होने से समस्या बढ़ती जा रही है। 

 

बजट खर्च के बावजूद सुधार नही

विधुत तंत्र सुधार को लेकर प्रति वर्ष बजट खर्च के बावजूद सुधार नहीं हो रहा है।ऊपर से डिस्कॉम में बड़ी संख्या में तकनीकी कार्मिको के रिक्त पड़े पद समस्या को ओर ज्यादा बढ़ा रहे हैं

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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