आबादी विस्तार के साथ आवासीय भूमि की सरकार नही कर रही हैं व्यवस्था।

आबादी विस्तार के साथ आवासीय भूमि की सरकार नही कर रही हैं व्यवस्था।
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आधा दर्जन खसरा भूमि का आबादी में कन्वर्जन नही, पटटो को तरसते हजारों परिवार।

दो साल से नगरपालिका प्रशासन व अध्यक्ष भी गहरी नींद में।

सिवाना

कस्बे के आबादी क्षेत्र में समय बीतने के साथ आबादी बेतहाशारूप से बढ़ रही है। लेकिन सरकार व सरकार के नुमाइंदे आमजन के लिए आवासीय योजनाओं को लेकर आँखे मूंदकर बैठे हैं। स्थानीय तत्कालीन ग्राम पंचायत से लेकर पिछले दो साल से नगरपालिका का राज होने के बावजूद आज दिन तक एक इंच भूमि को आबादी में कनवर्ड नही की। नतीजन आज लोग सरकारी भूमि में बसे हुए हैं। लेकिन उनको यह डर सता रहा है कि कब सरकार उनके आशियाने तोड़ न दे। विडम्बना तो यह है कि सिवाना कस्बे निवासी पिछले 15 साल से विधायकी की सीट पर काबिज होने के बावजूद कस्बेवासियों के आवासीय भूमि अलॉटमेंट के लिए कोई पैरवी नही किये जाने के कारण वर्तमान में कस्बे में आधा दर्जन गेर मुमकिन खसरा भूमि का आजादी के बाद से अभी तक आबादी में सम्परिवर्तन (कन्वर्जन)नही हो पाया है। नतीजन खसरा भूमि में पांच दशकों से आबाद लगभग ढाई हजार परिवार पटटो को तरस रहे हैं। इसमें ग्राम पंचायत के चुनींदा सरपंच से लेकर वर्तमान में नगरपालिका की कुर्सी पर विराजमान नगरपालिका अध्यक्ष व प्रशासनिक अधिकारी भी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। लेकिन उक्त चुनिंदा जनप्रतिनिधि व सरकारी कारिंदे गरीबो की जरूरत को दरकिनार कर मलाईदार कार्यो में व्यस्त होकर चांदी कूटने में लगे हुए हैं। जबकि गत पांच दशक से लगातार उक्त जरुरत मंद परिवारों द्वारा समय समय पर प्रशासनिक जन शिविरों एव चुनिंदा जनप्रतिनिधियों व राजस्व मंत्री से मर्तबा कई बार लिखित मांग करने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं हो पाने से उक्त परिवारों में आक्रोश व्याप्त है। 

इन मोहल्लों के परिवार तरस रहे पट्टो को।

कस्बे के हिंगलाज कॉलोनी, भाट बस्ती, ईदगाह कॉलोनी, देवन्दी रोड भील बस्ती, नट कॉलोनी महाराणा प्रताप कॉलोनी, मेला मैदान के इर्द गिर्द की बस्तियां सहित आधा दर्जन खसरों में गत पांच दशकों से लगभग ढाई हजार परिवार आबाद है। उक्त कॉलोनियों में सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद वर्षो से लोगो को अपने आशियानों के पट्टे नसीब नहीं हो रहे हैं।

 

पांच दशक से दे रहे चुनावी झांसे।

पिछले पचास साल से विधायक चुनाव से लेकर ग्राम पंचायत के सरपंच पद चुनाव नगरपालिका अध्यक्ष पद तक आमजन को पट्टो की कार्यवाही का झूठा झांसा देकर चुनाव में नेता वोट बटोर कर चले जाते हैं। जितने ” मौजा ही मौजा” में लगे हुए हैं। जीसके चलते उक्त गरीब व पिछड़े वर्ग के परिवारों को सरकारी आवास योजना का भी लाभ नही मिल पा रहा है। साथ ही बैंक ऋण लेकर भी आवास नही बना पा रहे हैं। इसके अलावा अन्य सुविधाएं जुटाने में परेशानी उठानी पड़ रही है। उक्त परिवारो द्वारा समय समय पर कई बार उक्त खसरों को आबादी में संम्परिवर्तन करने व पट्टे दिलाने की मांग राजस्व शिविरों में व जनप्रतिनिधियों से की । लेकिन आज दिन तक कोई कार्यवाही नही हो पाई है।

 

कार्यवाही नही हो रही है

गत वर्षों के दरम्यान ग्राम पंचायत की बैठकों के मार्फ़त उक्त खसरों को आबादी में कन्वर्जन के प्रस्ताव आगे उच्च स्तर पर भेजे गए लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो पा रही है।आजादी के समय से हजारों परिवार उक्त गेर मुमकिन खसरों पर आबाद है।लेकिन मांग के बावजूद उक्त खसरों की भूमि आबादी में कन्वर्जन नही हो पा रही है। शीघ्र आबादी में कन्वर्जन कर लोगो को पट्टे दिलवाए जाए।

चन्दनसिंह राजपुरोहित पूर्व पार्षद सिवाना।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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