आठ माह से चिकित्सक का पद रिक्त, दर्जनों गांवों के मरीज मेल नर्स व कम्पाउंडर के भरोसे

आठ माह से चिकित्सक का पद रिक्त, दर्जनों गांवों के मरीज मेल नर्स व कम्पाउंडर के भरोसे
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पीएचसी में सुविधा के नाम पर सिर्फ मरहम पट्टी, सीबीसी जांच ठप, मरीज परेशान

महिला चिकित्सक के अभाव में गर्भवती महिलाओं को होना पड़ रहा है शर्मिंदा, पुरुष चिकित्सक करवाते हैं डिलीवरी

मोकलसर

मरीज दर्द से कराह रहे हैं, वहीं जनता जनप्रतिनिधियों व चिकित्सा विभाग के अधिकारियों से यहां कम से कम एक चिकित्सक लगाने की मांग कर रहे हैं, मगर 8 माह बीत जाने के बाद भी कोई सुनवाई नही होना, यह आश्चर्य का विषय हैं। जिम्मेवारों के उदासीन रवैये के चलते चिकित्सा सेवा में कोई सुधार के प्रयास नजर नही आ रहे हैं। सिवाना उपखंड क्षेत्र के नेशनल हाइवे 325 पर स्थित राजकीय दरजानी चिकित्सालय मोकलसर के भरोसे मायलावास, रमणिया, मोतीसरा, काठाड़ी, धीरा, कुंडल, डाबली, राखी सहित दर्जनभर गांवो के 50 हजार से ज्यादा लोग हैं। अस्पताल में ओपीडी के दौरान आधी से अधिक भीड़ महिलाओं और बच्चों की होती हैं। ऐसे में ग्रामीण इस बार क्षेत्र के एकमात्र चिकित्सालय में महिला चिकित्सक लगाने की मांग कर रहे हैं। उल्लेखनीय हैं कि मोकलसर के राजकीय प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र पर कार्यरत चिकित्सक डॉ आकाश बोड़ा का तबादला दूसरी जगह होने से यहाँ के मरीज मेल नर्स और कम्पाउंडरो के भरोसे इलाज करवा रहे हैं। हर बार राज्य सरकार का बजट पारित होने से पहले ग्रामीण उम्मीदे लगाते हैं लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगती है। बता दें कि मोकलसर-मायलावास क्षेत्र सिवाना उपखण्ड का सबसे बड़ा क्षेत्र है। ऐसे में यहां चिकित्सा, शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं के बेहतर होने की उम्मीद रहती है। लेकिन यहां चिकित्सा सुविधा बेहतर नही है। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र और जनसंख्या के अनुसार इस पीएससी को सीएससी में क्रमोन्नत कर सुविधाओं का विस्तार होना चाहिए। सीएससी बनने पर स्टाफ और चिकित्सक लगने से समय पर लोगो को इलाज मिल जाएगा, लेकिन लम्बे समय से मांग के बावजूद सरकार इस ओर ध्यान नही दे रही है। वर्तमान में मोकलसर स्थित प्राथमिक चिकित्सालय में एक भी चिकित्सक कार्यरत नही हैं, ऐसे में मरीज अपना इलाज कम्पाउंडरो और नर्सो से करवा रहे हैं।

 

दर्जनों गांवों को इस अस्पताल से रहती हैं उम्मीद

मोकलसर क्षेत्र के मायलावास, रमणिया, काठाड़ी, धीरा, कुंडल, मोतीसरा, डाबली, सेवाली, राखी, वालू सहित 25 से अधिक गांवो, ढाणियों के ग्रामीण उपचार करवाने कस्बे के चिकित्सालय पहुचते है। लेकिन यहां प्रयाप्त चिकित्सक व सुविधाए नही होने पर लोगो को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं दुर्घटनाओं में घायलो को 10 से 30 किमी सिवाना, 50 से 100 किमी दूर बालोतरा ले जाना पड़ता है। अधिक दूरी और खस्ताहाल सड़को पर पहुचने में कई घण्टे लग जाते हैं। इस पर कई बार मरीज की जान पर बन आती है।

 

महिला चिकित्सक नही पुरुष चिकित्सक करवाते हैं डिलीवरी

क्षेत्र का एकमात्र प्राथमिक चिकित्सालय में एक पुरुष चिकित्सक कार्यरत थे। चिकित्सालय में प्रतिमाह 50-70 गर्भवती महिलाओं की यहां डिलीवरी होती है। लेकिन महिला चिकित्सक के नही होने के कारण महिलाओं की डिलीवरी पुरुष चिकित्सक के द्वारा की जाती है। महिला चिकित्सक नही होने के कारण महिलाओं को अपनी पीड़ा बताने में काफी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।

 

आखिर सुनवाई क्यों नही…?

एक तो यह अस्पताल एनएच 325 पर स्थित हैं, जहां आए दिन हादसे होते रहते हैं, ऐसे में कंपाउंडरों से जितना बन सकता हैं वो इलाज करते हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यह कि आखिर इतने बड़े अस्पताल पर एक भी चिकित्सक क्यों नही, ऐसा भी नही की चिकित्सा महकमा व जनप्रतिनिधि इस बारे में अनभिज्ञ हो। आखिर क्या वजह हैं कि इतनी बड़ी जन समस्या को अनदेखा किया जा रहा हैं, जनता का आक्रोश फुट रहा हैं, जनता कब वोट के प्रहार से करारा जवाब दें इस पर कुछ कहा नही जा सकता।

 

पीएचसी में सीबीसी जांच ठप, मरीज परेशान

गर्मी की वजह से कई तरह के बीमारियों से ग्रसित मरीज पीएचसी पहुंच रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा मरीज बुखार से ही पीड़ित होते हैं। लैब में मशीन तो है मगर इसकी सुविधा मरीजों को नहीं मिल पा रही है। पीएचसी की लैब में केमिकल न होने से सीबीसी जांचे करीबन एक महीने से बंद हैं। इससे मरीजों को सिवाना उप जिला अस्पताल तक दौड़ लगानी पड़ रही है। साथ ही कहि बार समय अभाव के कारण 300 रुपये खर्च कर बाहर निजी हॉस्पिटल व लैब से जांचे कराना पड़ रही हैं। सीबीसी मशीन बंद होने से यहां आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बता दे कि पीएचसी में ओपीडी में करीब 200 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें 60 प्रतिशत मरीज बुखार से पीड़ित पहुंच रहे हैं। जांच कराने के लिए मरीजों मजबूरी में अधिक दाम खर्च कर बाहर से करानी पड़ रही है।

 

तीन साल से एएनएम का पद रिक्त

मोकलसर कस्बे में दर्जनों गांवों की सुविधा के लिए बना राजकीय प्राथमिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले तीन साल से एएनएम नहीं होने से क्षेत्र के आस पास की गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की नियमित जांच नहीं हो पा रही है। वहीं दूसरी ओर सरकार की तरफसे गांवों में बेहतर चिकित्सा सुविधा का ढिंढोरा पीटने वाले इस चिकित्सा महकमें के पास कार्मिकों का अभाव होने से जहां जरूरत है ऐसे पीएचसी केन्द्र पर कार्मिकों के पद रिक्त चल रहे हैं इसके बावजूद चिकित्सा विभाग के आला अधिकारी इस ओर ध्यान तक नहीं दे रहे हैं। ग्रामीणों की मानें तो मोकलसर गांव की आबादी को देखते हुए चिकित्सा विभाग की ओर से गांव में स्थित पीएचसी केन्द्र पर दो एएनएम का पद स्वीकृत कर रखा है, लेकिन पिछले दो साल से यह पद रिक्त हैं। ग्रामीणों की माने तो तीन साल पहले मोकलसर गांव में एएनएम चिकित्सा कर्मी कार्यरत थे, लेकिन किसी कारण से चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने दोनों कार्मिकों को इधर उधर प्रतिनियुक्ति पर लगा दिया गया था या खुद स्थानांतरित होकर अपने जिले में चले गए। ऐसे में तीन साल से एएनएम का पद रिक्त होने से कई गर्भवती महिलाओं को टीका नही लग रहा हैं।

 

सुविधा बेहतरीन मगर स्टाफ की कमी

पीएचसी केन्द्र मोकलसर पर बेहतरीन सुविधा होने के बावजूद चिकित्सा कार्मिकों की कमी का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। वही चिकित्सा विभाग की ओर गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशु उसकी माता के टीकाकरण के लिए पीएचसी के चक्कर लगा रहे है। वही हर गुरूवार को टीकाकरण के लिया आने वाली गर्भवती महिलाओं को कल आना परसू आना के बहाने के साथ घर भेज दिया जाता है, लेकिन चिकित्सा विभाग की ओर से भी कोई वैकल्पिक बंदोबस्त नही किये गए हैं।

 

दस आंगनबाड़ी केंद्र हैं इस पीएचसी केन्द्र के अंतर्गत :

इस पीएचसी के दायरे में कुल दस आंगनवाडी केन्द्र है प्रत्येक केंद्र से गुरुवार को गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण के लिए पीएचसी केन्द्र भेजा जाता है। लेकिन एएनएम नही होने से बिना टीकाकरण के लौटना पड़ रहा है। वही जिम्मेदार जवाब देने से बच रहे है

इनका कहना

आचार सहिंता हटते ही रिक्त डॉक्टर व एएनएम का पद भर दिए जाएंगे, सीबीसी जांच की मैं बात करके समस्या का निस्तारण करवाता हु, साथ ही मोकलसर पीएचसी को सीएचसी बनाने के लिए प्रपोजल भेजा हुआ है जल्द ही मोकलसर पीएचसी को सीएचसी बना दिया जाएगा।  

 जगत नारायण स्वामी, बीसीएमओ सिवाना

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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