धूल धूसरित व गड्डो में तब्दील हुई सड़क, पैदल चलना हुआ मुश्किल।

धूल धूसरित व गड्डो में तब्दील हुई सड़क, पैदल चलना हुआ मुश्किल।
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रमणीया सरहद से लेकर स्वामियों की ढाणी धीरा तक लोगों के लिए नासूर बनी सड़क

मोकलसर

राज्य सरकार व केन्द्र सरकार भले ही ग्रामीण सड़कों को मुख्य सड़क से जोड़ने की ढिढोंरा पीटती हो। किंतु जमीनी सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। सिवाना उपखंड क्षेत्र के गांवो की कई सड़कें अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं। वो सड़कें इतनी जर्जर हाल में हैं। कि लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया हैं। इसके बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधियों का इस तरह चुप्पी साधना कई सवालों को जन्म दे रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना विभाग द्वारा बनाई गईं सड़कें विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के कारण एवं संबंधित निर्माण एजेंसी ठेकेदारों की लापरवाही के चलते जर्जर स्थिति में पहुंच गई हैं। यही हाल रमणिया से धीरा जाने वाले 5 किमी सड़क मार्ग का हैं। आज से दशक पूर्व बनी इस सड़क का नामोनिशान मिट चुका हैं, सड़क कंक्रीट में तब्दील हो चुकी हैं आए दिन वाहन चालक चोटिल हो रहे हैं और गाड़ियां पंचर होना तो आम बात हैं मरम्मत को लेकर कई बार जिम्मेदारों को अवगत करवाया मगर उनकी तरफ से सिर्फ आश्वासन ही मिला हैं, नतीजन परिणाम आमजन भुगतने पर मजबूर हैं।

 

अवगत करवाने के बावजूद स्थिति जस की तस

इस सड़क की मरम्मत को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों, विभागीय अधिकारियों को अवगत करवाया गया, मगर आज दिन तक सुध नही ली गयी हैं। परिणामस्वरूप इस सड़क का आज नामोनिशान मिट चुका हैं। अगर समय रहते इनको दुरुस्त नही किया गया तो इन सड़कों पर से पैदल गुजरना दुश्वार हो जाएगा।

 

अधिकारी व जनप्रतिनिधि करते हैं टालमटोल

सड़क मार्गों की समस्या को लेकर जब अधिकारी या जनप्रतिनिधियों से बात की जाती हैं तब बजट नहीं हैं या अन्य कोई बहाना बनाकर टालमटोल कर दिया जाता हैं। हालांकि चुनावों के दौरान सड़क सौंदर्यकरण का दावा किया जाता हैं लेकिन चुनाव होते ही वो वादे सिर्फ यादें बनकर ही रह जाते हैं।

इनका कहना।

दशक पूर्व बनी यह 5 किमी सड़क बिखर कर कंक्रीट में तब्दील हो चुकी हैं। यहां से गुजरना जोखिम भरा सफर हैं, मरम्मत के लिए कई बार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को अवगत करवाया गया मगर आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई हैं। सड़क की मरम्मत करवाकर आमजन को राहत देनी चाहिए।

भैराराम मेघवाल धीरा सामाजिक कार्यकर्ता सिवाना

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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