रेगिस्तान में आई मारवाड़ी मेवों की बहार, जाळ पीलू से लटालूम

रेगिस्तान में आई मारवाड़ी मेवों की बहार, जाळ पीलू से लटालूम
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औषधीय गुणों से भरपूर, कई बीमारियों का रामबाण इलाज 

मायलावास

रेगिस्तान की बंजर भूमि पर इन दिनों जाळ के वृक्ष पीलू से लदे हुए हैं। छोटे बच्चे अपने गले में बर्तन डाले पिलुओं को संग्रहित करते नजर आ रहे हैं। गौरतलब है कि रेगिस्तान की यह भूमि भले ही बंजर हो, लेकिन प्रकृति ने कुछ ऐसी अनमोल सौगातें रेगिस्तान के लोगों को प्रदान की हैं, जिससे रेगिस्तान वासियों को ऋणी रहना चाहिए। यहां प्रचंड गर्मी की शुरुआत होते ही रेगिस्तान में विषम हालात में भी जिंदा रहने वाले पौधे फल देना शुरू कर देते हैं। जाळ के वृक्ष पर रंग-बिरंगे फल पीलू से लदे हुए हैं जो हर किसी को अपनी और आकर्षित करने को मजबूर कर देते हैं। एकदम मीठे रसभरे इस फल की सबसे बड़ी खासियत यह हैं कि इसे अकेला खाते ही जीभ छिल जाती हैं ऐसे में एक साथ आठ-दस दाने मुंह में डालने पड़ते हैं। यह पेड़ बेतरतीबी से फैलाव लिए होता हैं। इस कारण स्थानीय बोलचाल में इसे जाळ कहा जाता हैं। जमीन तक फैले जाळ के ऊपर भेड़ व बकरियां बड़े आराम से चढ़ जाती हैं। तेज गर्मी के साथ जाळ के पेड़ पर हरियाली छा जाती हैं और फल लगने शुरू हो जाते हैं। इस छोटे से रसीले फल को पीलू कहा जाता हैं। लाल, पीले व बैगनी रंग के इन फलों से एकदम मीठा रस निकलता हैं। इन दिनों मारवाड़ में हर तरफ पीलू की बहार आई हुई हैं। इसे तोड़ने के लिए महिलाएं व बच्चे सुबह जल्दी गले में एक डोरी से लोटा बांध जाळ पर जा चढ़ते हैं। एक-एक पीलू को तोड़ एकत्र करना श्रम साध्य कार्य हैं। जिन्हें बच्चों को आम रास्ते पर बेचे हुए देखा जा सकता हैं।

 

पीलू को खाने का भी एक अलग तरीका हैं

यदि किसी ने एक-एक कर पीलू खाए तो उसकी जीभ छिल जाएगी। वहीं एक साथ आठ-दस पीलू मुंह में डालकर खाने से जीभ बिलकुल नहीं छिलती। इस बात को जब इनका स्वाद नही चखने वालों के साथ साझा की जाती हैं तो वो यकायक आश्चर्य में पड़ जाते हैं, लेकिन यही वास्तविकता हैं कि इन्हें एक से ज्यादा संख्या में ही खाया जाता हैं। अन्यथा जीभ छिल जाती हैं।

 

लू से करता हैं बचाव

रेगिस्तान के इस मेवे के बारे में प्रसिद्ध हैं कि यह पौष्टिकता से भरपूर होता हैं और इसे खाने से लू नहीं लगती। साथ ही इसमें कई प्रकार के औषधीय गुण भी होते हैं। औषधीय गुण के कारण महिलाएं पीलू को एकत्र कर सुखाकर प्रीजर्व कर लेती हैं ताकि बाद में जरुरत पड़ने पर ऑफ सीजन में भी इसे खाया जा सके।

 

स्वादिष्ट है मारवाड़ का पीलू

पीलू दिखने में जितना रसीला लगता है उतना ही खाने में स्वादिष्ट होता है यह फल राजस्थान की पश्चिम सभ्यता और परंपराओं की याद दिलाता है। भीषण गर्मी में यह पीलू हैजा जैसी भयंकर बीमारियों से बचाव करता है। वहीं दूसरी ओर रास्ते में थके यात्रियों में यह पिल्लू नई ऊर्जा का संसार करते हैं। वहीं बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि एक-एक कर पीलू के दाने खाने से मुंह में छाले हो सकते हैं इसलिए उनके पांच से सात दाने एक साथ खाए जाते हैं।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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