सड़कों पर सरपट दौड़ रहे ओवरलोड ईंटों से भरे ट्रेक्टर-ट्रॉली

सड़कों पर सरपट दौड़ रहे ओवरलोड ईंटों से भरे ट्रेक्टर-ट्रॉली
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कार्यवाही का डर नही, अन्य वाहनों के लिए बनते हैं सरदर्द फिर भी उदासीन परिवहन महकमा

मोकलसर

सिवाना उपखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवो में सैकड़ों की संख्या में बिना पंजीकरण के ही ट्रॉलीयां दौड़ रही हैं। जिससे परिवहन विभाग को लाखों रुपये का फ़टका लग रहा हैं। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। आलम यह हैं की ऐसी ट्रॉली ट्रैक्टर के साथ एनएच 325 पर सरपट दौड़ रही हैं। इनमें से कई ट्रॉलियां तो ऐसी हैं जिनका रजिस्ट्रेशन तक नही हैं। वहीं इन्हीं ट्रॉली से कृषि का काम भी किया जा रहा है और व्यवसाय भी हो रहा है। इतना ही नहीं ट्रैक्टर ट्रॉली से सवारियों को ढोने का कोई प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद धड़ल्ले से सवारियां भी ढोई जा रही हैं। बता दें कि कृषि यंत्र के रूप में टैक्स से छूट पाने वाली ट्रॉली का इस्तेमाल भी हर तरह के व्यवसाय में किया जा रहा है, लेकिन परिवहन विभाग के अधिकारियों को इससे भी कोई मतलब नहीं है की ट्रॉली रजिस्टर्ड है भी या अनरजिस्टर्ड ही संचालित हो रही है, इसकी भी जांच नहीं की जाती है। इससे विभाग को राजस्व का भी फ़टका लग रहा हैं। कार्यवाही के अभाव में व ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में ट्रैक्टर चालकों ने ट्रॉली की ऊंचाई बड़ा रखी हैं, यही नही इतनी ऊंचाई बढ़ाने के बावजूद भी ट्रॉली को इट्टों से ओवरलोड किया जाता हैं। ऐसे में कब ऊपर से ईंट नीचे गिरकर किसी की जान पर बन जाएं इस पर कुछ कहा नही जा सकता। बावजूद इसके इन पर कार्यवाही नही होने से परिवहन विभाग पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

 

अलग-अलग होते हैं ट्रैक्टर ट्रॉली के नंबर

हालांकि कई ट्रॉलियां पर तो नम्बर भी अंकित नही होते, और जिनके होते हैं उनमें से भी ट्रेक्टर व ट्रॉली के अलग-अलग नम्बर होते हैं। कई बार ऐसा भी होता हैं कि जब ट्रैक्टर मालिक ट्रैक्टर का रजिस्ट्रेशन करवाते हैं और बाद में जब ट्रॉली खरीदते हैं तो उसका रजिस्ट्रेशन करा लेते हैं, लेकिन ज्यादातर ट्रैक्टर के बाद जो भी मालिक ट्रॉली खरीदते हैं उसका रजिस्ट्रेशन कराते ही नहीं हैं, जिससे विभाग को सीधे तौर पर नुकसान झेलना पड़ता हैं।

 

नाबालिग व नौसिखियों के हाथों में होती हैं ट्रेक्टर की स्टीयरिंग

ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसा कई बार देखने को मिलता हैं कि ट्रैक्टर की स्टेयरिंग नाबालिग, नौसिखियों के हाथों में होती हैं। जिनके पास इनका लाइसेंस तक नहीं होता। वो सड़कों पर इस कदर ट्रेक्टर दौड़ाते हैं जैसे खेत जोत रहे हो। इसके बावजूद भी इन्हें देखकर परिवहन विभाग की आंख मूंदे रहती है। साथ ही घनी आबादी के बीच तेज आवाज में गाना बजाते सुबह-दोपहर-शाम बेलगाम रफ्तार से चलने वाले इन ट्रैक्टरों को रोकने वाला कोई नही हैं।

 

आए दिन होते हादसों के बाद भी नही जाग रहा परिवहन महकमा

सभी जानते हैं कि ट्रैक्टर की ट्रॉलियों में सिग्नल नहीं होने एवं इंजन की एक हेड लाइट जलाकर तेज एवं लापरवाह पूर्वक चलाने के कारण आए आए दिन हादसे होते रहते हैं, और चालक फरार हो जाते हैं, ऐसे में ट्रॉली पर नम्बर नही होने की वजह से चालक का पता भी नही चलता और ऐसा पहले भी हो चुका हैं। बावजूद इसके परिवहन महकमा इन पर अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रहा हैं।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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