परेशानी: सांकेतिक बोर्ड के अभाव में राह भटक रहे राहगीर

परेशानी: सांकेतिक बोर्ड के अभाव में राह भटक रहे राहगीर
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मायलावास चौराया और गौगाजी चौराया पर नही हैं रेलवे स्टेशन जाने का सांकेतिक बोर्ड

मायलावास

सिवाना उपखंड क्षेत्र के मोकलसर रेलवे स्टेशन से जुड़े गांव मायलावास, मोतीसरा, सिवाना, रमणिया, काठाड़ी, रायथल इत्यादि दर्जनों गाँवो के सैकडों यात्री अपने गंतव्य स्थल तक पहुंचने के लिए मोकलसर रेल्वे स्टेशन पर पहुँचते हैं। मगर अजनबी यात्रियों को सांकेतिक बोर्ड के अभाव में दर बदर भटकना पड़ता हैं या फिर लोगों को पूछकर स्टेशन जाने का रास्ता पता करना पड़ता हैं। ऐसे में कई बार यात्रियों की ट्रेन भी चूक जाती हैं। गौरतलब हैं कि मायलावास चौराये से स्टेशन जाने हेतु दो मार्ग हैं जो कि एक तो राखी रोड़ से होकर जाता हैं तो दूसरा गौगाजी चौराये से होकर जाता हैं लेकिन इन दोनों जगहों पर सांकेतिक बोर्ड नही होने की वजह से कई यात्री रास्ता भटक जाते हैं। ऐसे में टेक्सी चालक कम दूरी होने के बावजूद भी यात्रियों से मोटी रकम वसूलते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व मायलावास चौराये पर उचित दूरी व मोकलसर स्टेशन जाने वाले रास्ते का सांकेतिक बोर्ड लगा हुआ था जिससे यात्रियों को स्टेशन पर पहुंचने में साहूलियत होती थी लेकिन कुछ वर्ष पूर्व कुछ अतिक्रमियों ने आमजन की सुविधा के लिए लगाए गए बोर्ड को वहां से हटा दिया था तब से अजनबी यात्रियों को परेशानी से रूबरू होना पड़ रहा हैं। बावजूद इसके जिम्मेवारों द्वारा राहगीरों की समस्या को अनदेखा किया जाकर सांकेतिक बोर्ड तक लगाने की जहमत नही उठाई जा रही हैं।  

 

जिम्मेदारों की अनदेखी, राहगीरों पर भारी

यात्रियों को हो रही इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने कई बार स्वर मुखर किए मगर जिम्मेदारों आज दिन तक यात्रियों की सुविधा हेतु सांकेतिक बोर्ड लगाने की जहमत नही उठाई हैं, ऐसे में जिम्मेदारों की अनदेखी रेलवे स्टेशन पंहुचने वाले यात्रियों के लिए भारी बनती जा रही हैं। हालात यह हैं कि कई बार तो यात्रियों की ट्रेन भी चूक जाती हैं, जिनको अक्सर वापिस निराश होकर घर लौटते हुए भी देखा गया हैं। लेकिन जिम्मेवारों द्वारा राहगीरों को हो रही इस परेशानी को अनदेखा किया जा रहा हैं।

 

इनका कहना

मायलावास चौराया और गौगाजी चौराया पर रेलवे स्टेशन जाने का सांकेतिक बोर्ड नही होने की वजह से आए दिन यात्री राह भटक रहे हैं, जिम्मेदार विभाग को सांकेतिक बोर्ड लगाकर यात्रियों को राहत देनी चाहिए, ताकि कोई भी राह नही भटकें।

हनुमानराम प्रजापत, व्यापारी मायलावास चौराया

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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