ग्रामीण लामबंद हुए, ओरण को डीम्ड फॉरेस्ट बनाने का विरोध जताया

ग्रामीण लामबंद हुए, ओरण को डीम्ड फॉरेस्ट बनाने का विरोध जताया
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ग्रमीणों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर लगाई न्याय की गुहार

सिवाना

राजस्थान में ओरण भूमियों को डीम्ड फॉरेस्ट घोषित प्रस्तावित किए जाने का विरोध शुरू हो गया है। गोचर व ओरण में रहने वाले लोग या इससे जुड़े लोगों ने राज्य सरकार के इस निर्णय को अनुचित बताते हुए ओरण को डीम्ड फॉरेस्ट बनाने के निर्णय पर आपत्ति दर्ज करवाई। वही प्रदेश सरकार की ओर से ओरण भूमियों को डीम्ड फॉरेस्ट घोषित प्रस्तावित किए जाने का विरोध शुरू हो गया है। सोमवार को गोचर को लेकर ग्राम पंचायत पर प्रदर्शन किया। वही एसडीएम कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम और प्रधान मुख्य वन संरक्षक राजस्थान के नाम ज्ञापन सौंपे गए। इस अवसर पर गोचर व ओरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने राज्य सरकार के इस निर्णय को अनुचित बताते हुए ओरण को डीम्ड फॉरेस्ट बनाने के निर्णय पर आपत्ति दर्ज करवाई। मोकलसर उप सरपंच वीरेंद्र सिंह बालावत ने बताया कि ओरण एवं अन्य पारिस्थिक तंत्र की भूमि से आमजन की भावनाएं जुडी हुई हैं। साधारणतया ओरण भूमि देवभूमि है, जो हमारे पुरखों ने राजस्थान की मरूभूमि के रेगिस्तानी स्वभाव को देखते हुए देवताओं के नाम पर छोडी थी। उसे राज्य सरकार वन विभाग को नहीं दे सकते यह एक निजी भूमि है। वही बालावत ने कहा कि ओरण पुरखों की ओर से देवताओं के नाम पर छोडी गई चारागाह भूमि है। यदि ओरण भूमि को डीम्ड फॉरेस्ट घोषित किया जाएगा तो ग्रामीणों को अपने पशुओं को चराना असंभव होगा। और सैकड़ों वर्षों पुराने मंदिर, स्कूल, पाईप लाईने और सैकड़ों कच्चे और पक्के मकान के साथ राज्य सरकार के करोड़ों रुपए से करवाए विकास कार्य भी संभव्त धूल में मिल जायेगे। सरकार ने समय समय पर इन सब जगह पर सड़के, जीएलआर, पानी की टंकी, बनाए है। वही पशुओ को भी दाने पानी की किल्लत झेलनी पड़ सकती है। मोकलसर सरपंच घेवर चंद सैन ने कहा कि ओरण भूमि डीम्ड फॉरेस्ट घोषित होती है तो जन आस्थाओं और मेलों के आयोजनों व धार्मिक उत्सवों पर विपरीत प्रभाव पडेगा और बरसो ने निवास कर रहे सैकड़ों लोगों को बेघर होना पड़ेगा। सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। प्रकाश सिंह ने बताया की हमने अपने स्तर पर आपत्ति दर्ज करवा दी है। हम यही रुकने वाले नही है। जन हितार्थ में हम आगे भी जरूरत पड़ने पर सबको साथ लेकर जिला कलेक्टर और वन मंत्री तक जायेगे। इस दौरान प्रकाश सिंह बालावत, तगसिंह बालावत, सुराराम मेघवाल, मांगीलाल मेघवाल, मांगूसिंह खींची, टीकमाराम, हड़मत सिंह सोलंकी, आबसिंह, नगाराम मेघवाल, जितेंद्र सिंह, खंगाराराम तीरगर, बाबूलाल ढोली सहित सैकड़ो ग्रामीणजन मौजूद रहे।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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