सौगात: जैसलमेर में 50 करोड़ से बनेगी वॉशिंग, पिट लाइन

सौगात: जैसलमेर में 50 करोड़ से बनेगी वॉशिंग, पिट लाइन
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12 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी करेंगे वर्चुअल शिलान्यास, जुड़ेँगी लंबी दूरी की ट्रेनें

जैसलमेर

जैसलमेर के लिए एक सुखद खबर है। जैसलमेर में बहुत जल्द वॉशिंग लाइन और पिट लाइन बनाई जाएगी जिससे लंबी दूरी की ट्रेनें जैसलमेर से जुड़ सकेंगी। इस योजना का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 मार्च को वर्चुअल शिलान्यास करेंगे। वर्चुअल शिलान्यास में वॉशिंग लाइन, ओएसओपी वन स्टेशन वन प्रोडक्ट, लोको शेड व पिट लाइन शामिल है। वॉशिंग लाइन के बनने के बाद जैसलमेर को लंबी दूरी की ट्रेनें मिलेंगी। लंबी दूरी की ट्रेनें मिलने से ज्यादा से ज्यादा सैलानी जैसलमेर आ सकेंगे। बताया जा रहा है कि इस पर करीब 50 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद अब 12 मार्च को पीएम मोदी इसका वर्चुअल शिलान्यास करेंगे। शिलान्यास के बाद बहुत जल्द वॉशिंग लाइन और पिट लाइन का काम शुरू होगा। इन दिनों जैसलमेर में लंबी दूरी की ट्रेनें बहुत कम हैं जिससे जैसलमेर से भारत के कई शहरों में जाने वाले स्थानीय लोगों और बाहर से जैसलमेर आने वाले सैलानियों को बहुत परेशानी होती है। वॉशिंग लाइन फिलहाल जोधपुर डिवीजन में केवल भगत की कोठी, जोधपुर और बाड़मेर में है। ऐसे में लंबी दूरी की गाड़ियां जोधपुर या बाड़मेर चली जाती हैं। इससे जैसलमेर के पर्यटन को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

 

140 करोड़ से एयरपोर्ट जैसा बन रहा रेलवे स्टेशन

गौरतलब है कि रेलवे द्वारा अमृत स्टेशन योजना के तहत जैसलमेर स्टेशन का 140 करोड़ रुपए की लागत से पुनर्विकास किया जा रहा है। इसी कड़ी में अब तक बिल्डिंग का लगभग 50 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। स्टेशन पुनर्विकास के लिए निर्धारित लक्ष्य 25 अक्टूबर 2024 तक पूरा कर लिया जाएगा। अभी यहां नया भवन, यात्रियों के लिए बैठने के लिए शेड, पीने के लिए पानी का बूथ व अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर को तैयार किया जा रहा है।

 

लंबी दूरी की ट्रेन मिलेगी

ट्रेन वाशिंग लाइन बनने से जैसलमेर को नई ट्रेनों को सौगात मिलने की संभावना जताई जा रही हैं, लंबी दूरी की जो ट्रेनें जोधपुर शहर में ठहराव करती हैं उन्हें जैसलमेर तक बढ़ाया जा सकता है। ट्रेनें बढ़ने और नए शहरों से कनेक्टिविटी बढ़ने से जैसलमेर के पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा और अन्य को भी इसका फायदा मिलेगा।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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