मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ओरण और गोचर भूमि में बसे लोगों के आशियाने बचाने की मांग

मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ओरण और गोचर भूमि में बसे लोगों के आशियाने बचाने की मांग
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व्यथा: गांव की आधी आबादी का आवासीय भूमि में विस्तार नही, लोगों को सता रहा बेघर होने का डर

मायलावास

सिवाना उपखंड क्षेत्र के मायलावास गांव में साल दर साल आबादी में विस्तार होता गया, गांव में पर्याप्त मात्रा में रहने की जगह नही होने की वजह से आबादी का विस्तार फैलता गया। और उन्होंने रहने के लिए पक्के मकानों का भी निर्माण कर दिया लेकिन उक्त भूमि का आबादी में कन्वर्जन नही होने की वजह से अब उन्हें अपने बनाये हुए आशियाने टूटने का डर सता रहा हैं। ग्रामीणों द्वारा लगातार उक्त भूमि को आबादी क्षेत्र में कन्वर्ट करवाने की मांग की जा रही हैं मगर अब तक कोई सुनवाई नही होने की वजह से रविवार को मायलावास सरपंच अशोकसिंह राजपुरोहित व उपसरपंच गलाराम के नेतृत्व में सिवाना तहसीलदार के मार्फ़त राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर कोर्ट से राहत दिलाने की मांग की हैं। 

उल्लेखनीय हैं कि ग्राम पंचायत मायलावास पंचायत समिति की बड़ी पंचायत हैं। जिसकी आबादी करीबन 12,000 हैं। पहले राजस्व ग्राम मायलावास ग्राम पंचायत मोकलसर के अधीन था। जो कि 1995 में मोकलसर से पृथक होकर नव सृजित ग्राम पंचायत बनी। यहां पीढ़ियों से लोग निवासरत हैं। जैसे जैसे गांव की आबादी बढ़ी त्यों त्यौ अज्ञानतावश अपने रहवासीय मकान आबादी के हिसाब से पास पड़ी औरण और गोचर में बनाते गये। जिनमे से कुछ लोगों ने तो रहवासी पट्टे बनवा दिए और सैकड़ों घरों ने जानकारी के अभाव में पट्टे बनवाए बिना ही आवासीय प्रयोजनार्थ मकान बना दिए। लेकिन उन्हें यह नही पता था कि जहां वो रहवासी मकान बना रहे हैं वो ओरण गोचर भूमि हैं।

 

सैकड़ों लोग हो जाएंगे बेघर

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बताया कि मायलावास कि आबादी पीढ़ियों से करीबन 100 बीघा भूमि में बसी हुई है। यदि रहवासरत आबादी को बेघर कर दिया गया तो हजारों परिवारों को सड़कों पर रहना पड़ेगा एवं वे बेरोजगार हो जाएँगे एवं उनको भूखे मरने कि नौबत आ जायेगी।

 

 

कमजोर पैरवी के चलते नही हुआ सीमाज्ञान

पत्र में बताया कि राजस्थान मे जिसकी भी सरकार बनी उसमे हमेशा से पटवारी और ग्राम विकास अधिकारियों के पास चार पाँच ग्राम पंचायतों का कार्यभार रहता था और वर्तमान में भी यही हालत है। कमजोर पैरवी के कारण समय-समय पर आबादी भूमि का सीमाज्ञान नहीं होने की वजह से आबादी से सटी होने की वजह से लोगो ने अपने रहवासी मकान बना लिये, उन्होंने अतिक्रमित जमीन कि किस्म परिवर्तीत करवाकर आबादी में परिवर्तित करवाने की मांग की हैं।

 

ग्रामीण बोले: सरकार लें पुनर्वास की जिम्मेदारी

पत्र में बताया कि यदि माननीय न्यायालय के आदेश कि पालना यदि राज्य सरकार के अधीन सरकारी विभाग रहवासी मकानो को अतिक्रमण मान कर उन्हे खाली करवा देते है तो उनके पुनर्वास की जिम्मेदारी भी सरकार की हैं। ताकि उनके सिर से छत नहीं हटे व उनके मूंह से निवाला नहीं छीना जाये। क्योंकि लोगों ने अज्ञानतावश ओरण और गोचर भूमि को ही आबादी भूमि समझ कर अपने पक्के मकान बना कर रहवास करने लगे हैं।

 

 

पूर्व में भी भेजा गया था प्रस्ताव

गांव में बसी आबादी को राहत दिलाने के क्रम में पहले भी ग्राम पंचायत व ग्रामीणों द्वारा प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें बताया गया था कि पूर्व पंचायतों द्वारा लंबे समय से आबादी प्रत्येक वर्ष कन्वर्ट नहीं कराई गई। जिसकी वजह से आबादी से सटी ओरण और गोचर भूमि में सीमाज्ञान के अभाव में लगभग 800 लोगों ने अपने मकान बना दिए हैं। और ग्राम पंचायत से एनओसी प्राप्त पट्टे, विद्युत कनेक्शन, नल कनेक्शन के साथ साथ सड़क, खरंजा आदि बना दिए। इसलिये अतिक्रमण की गई जमीन के बदले ओरण और गोचर भूमि को सुरक्षित बनाए रखने के लिए ग्राम पंचायत व भामाशाह जमीन देने को तैयार हैं। ताकि कोई भी परिवार घर से बेघर नही हो।

 

इनका कहना

गांव में पीढ़ियों से आबादी निवासरत हैं, अज्ञानतावश लोगों ने ओरण और गोचर में पक्के निर्माण करवा दिए हैं, अगर इन्हें तोड़ा गया तो गांव की आधी आबादी बेघर हो जाएगी, इसलिए सरकार इनके पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करें, और ग्राम पंचायत व भामाशाह ओरण और गोचर भूमि को सुरक्षित रखने के लिए अतिक्रमण की गई जमीन के बदले जमीन देने को तैयार हैं। 

अशोकसिंह राजपुरोहित, सरपंच मायलावास

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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