विशाल केसरिया वाहन रैली में युवाओं ने दिखाया युवा जोश

विशाल केसरिया वाहन रैली में युवाओं ने दिखाया युवा जोश
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सायला

राजपूत दहिया राजवंश द्वारा राणा चच्चदेव दहिया की 1057वीं जयन्ती पर सोमवार को सायला स्थित कात्यायनी माता मंदिर से कैवायमाता मंदिर धाम बावतरा तक विशाल केसरिया वाहन रैली का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में समाजबन्धुओ ने उत्साह के साथ भाग लिया।

वाहन रैली को लेकर सवेरे से ही समाजबंधु पारम्परिक वेशभूषा व केसरिया साफे में सजधज कर विभिन्न वाहनों के साथ सायला स्थित कात्यायनी माता मन्दिर पहुंचने शुरू हो गए। प्रातः 10 बजे तक बड़ी संख्या में समाजबंधु एकत्रित हो गए। तत्पश्चात उम्मेदाबाद महन्त आशा भारती महाराज ने राणा चच्चदेव की तस्वीर पर माल्यार्पण किया एवं रैली को केसरिया झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली में शामिल समाजबन्धु राणा के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। रैली सायला, चौराऊ, मोकनी फांटा होते हुए बावतरा स्थित कैवायमाता मंदिर धाम पहुंची। मन्दिर में समाजबंधुओं ने माताजी के दर्शन कर शीश नवाया। कार्यक्रम के तहत कैवायमाता धाम को भी रंग बिरंगी रोशनी व फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया था। इस मौके महाप्रसादी का भी आयोजन किया गया। इस दौरान आबकारी अधिकारी शम्भसिंह सेरणा, दीपसिंह धनानी, उदयसिंह दादाल, नैनमल लखारा, खंगारसिंह आसाना, लालसिंह भुंडवा, मंगलसिंह सायला, भूरसिंह सुराणा, सायला पूर्व उपसरपंच विक्रमसिंह, धनसिंह ओटवाला, विक्रमसिंह अध्यक्ष सहकारी समिति सायला, मानवेंद्रसिंह वालेरा, एडवोकेट इंद्रसिंह सायला, ज्ञानसिंह भुंडवा, भंवरसिंह सुराणा, माधुसिंह तूरा, हड़मतसिंह सिराना, रतनसिंह चौराउ, लालसिंह तूरा, पहाड़सिंह बावतरा, दिनेशसिंह ओटवाला, प्रेमसिंह सायला, राणसिंह बावतरा, पृथ्वीसिंह थलवाड़, बाबूसिंह भुंडवा समेत अनेक राजपूतों ने भाग लिया।

वक्ताओं ने राणा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। सभा का संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि जालोर विधायक व विधानसभा मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि यह पूरा क्षेत्र दहियावटी के नाम से जाना जाता है तथा राणा चच्चदेव दहिया के ऐतिहासिक व्यक्तित्व व शासनकाल पर प्रकाश डाला। मुख्य सचेतक ने विधानसभा क्षेत्र जालोर की गौशालाओं में ट्यूबवेल करवाने का आश्वासन दिया। आबकारी अधिकारी शंभूसिंह सेरणा ने समाज में बालिका शिक्षा पर जोर देते शिक्षा को समय की आवश्यकता बताया। सायला सरपंच रजनी कंवर ने कहा कि क्षत्रियोचित गुणों को जीवन में उतारते हुए छत्तीस कौम को साथ लेकर चलने का आहवान किया। सभा में दीपसिंह धनानी ने भी अपने विचार प्रकट किए व अंत में वरदसिंह वालेरा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

संपादक: भवानी सिंह राठौड़ (फूलन)

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